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जूनागढ़ का किला बीकानेर | The astonishing contour of palaces

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बीकानेर के जूनागढ़ किले से पहले मै अब तक भारत के तक़रीबन 20 किले देख चुका हूँ, जिनमे से कुछ किलो का रखरखाव काफी अच्छा था जैसे की जोधपुर का मेहरानगढ़ किला और कुछ किले रखरखाव के अभाव में लुप्त होने की कगार पर है जैसे की बूंदी का तारागढ़ किला | बीकानेर का जूनागढ़ किला अपनी भव्यता के मामले में इन सब किलो को कड़ी टक्कर देता है, ये उनकी तरह किसी पहाड़ी पर भी नहीं बना फिर भी आजतक इसे कोई जीत नहीं पाया| 37 बुर्ज वाला ये किला 12 मीटर ऊँची दीवार पर बना है जिसके चारो तरफ सुरक्षा हेतु एक गहरी खाई हुआ करती थी और इसे बनाने के लिए लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ है |

जूनागढ़  का अर्थ होता है पुराना किला, और ये नाम इस किले को 20वी सदी में मिला था जब राज परिवार किले से पलायन कर लालगढ़ पैलेस में रहने लगा था | पलायन की वजह थी के ये किला महाराजा गंगा सिंह को अपने आधुनिक राजकुमार के लिए उपयुक्त नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने शहर से बाहर यूरोपियन शैली में बने महल को अपना आवास बना लिया था | 20वी सदी से पहले जूनागढ़  किले को चिंतामणि दुर्ग कहा जाता था, मै अपने इस लेख में आपका जूनागढ़ किले में बने भव्य महलो से परिचय करवाऊंगा लेकिन उस से पहले किले के इतिहास के बारे में थोडा बता दू |

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जूनागढ़ किले के अंदर एक महल

राव बीका ने नहीं बनवाया था जूनागढ़ का किला

जैसे राव जोधा ने जोधपुर का किला और रावल जैसल ने जैसलमेर का किला बनवाया था वैसे राव बिका ने बीकानेर की स्थापना तो की लेकिन जूनागढ़ का किला नहीं बनवाया | जूनागढ़ किले को बनाने का श्रेय जाता है बीकानेर के 5वे महाराजा राय सिंह को, रायसिंह मुग़ल दरबार के एक विश्वस्त सेनापति भी थे और उन्होंने मेवाड़ के खिलाफ मुगलों का साथ दिया जिस से खुश होकर मुग़ल सल्तनत ने उनको गुजरात की कुछ छोटी रियासतों की जागीरदारी दे दी | उन रियासत से आने वाले धन से उन्होंने जूनागढ़ किले का निर्माण करवाया , जूनागढ़ को बनाने में 1584 से 1589 तक 5 साल लगे | शुरुवात में जूनागढ़ में केवल दो महल थे बाद में अलग अलग महाराजाओ ने अपने राज में अपने नाम से भव्य महल बनवाए जिनके बारे में इस लेख में मै आगे बताऊंगा |

 जूनागढ़ किले के भव्य महल

जूनागढ़ किले के मुख्य द्वार पर मेहरानगढ़ की तरह सती  हुई रानियों के हाथो की छाप नजर आती है,  एक जमाना था जब राजपूत राजा के मरने के बाद रानी को सती होना पड़ता था| और जब सती होने कोई रानी जाती थी तो वो किले के आखरी पोल यानि दरवाजे पर सिन्दूर भरे हाथो की छाप लगाती थी बाद में उस निशान को पत्थर पर हाथ जैसी शिल्पकारी कर उसे ढक दिया जाता था | टिकेट लेने के बाद जब हम जूनागढ़  किले में प्रवेश करते है तो सबसे पहले दाहिनी तरफ यूरोपियन शैली में बनी भव्य सीढ़िया आती है , बनावट से ही पता चलता है ये ब्रिटिश राज के दौरान बनाई गई थी |

सीढियों के पास से एक संकरा रास्ता जूनागढ़ किले के मुख्य प्रांगन में ले जाता है जहाँ आता है करण महल |

करण महल 

BIKANER, जूनागढ़ किला

राजपूत और मुग़ल शैली में बने करण महल का निर्माण महाराजा करण सिंह ने औरंगजेब पर जीत की खुशी में करवाया था, महल को बनाने के लिए लाल बलुआ पत्थर के साथ संगमरमर का भी प्रयोग हुआ है | महल के अंदर शीशे और अन्य सजावट का काम महाराजा अनूप सिंह के समय में हुआ था |

गाइड के अनुसार ये जगह होली खेलने के लिए प्रयोग की जाती थी, बीच में बना मंडप राजा के बैठने का स्थान होता था और सामने बने प्रांगण में न्रत्य आदि के कार्यक्रम होते थे |

फूल महल 

फूल महल जूनागढ़ किले का सबसे पुराना महल है , महाराजा राय सिंह ने इसका निर्माण करवाया था , महल की दीवारों पर खुबसूरत चित्रकारी और शीशे की सजावट का काम है | ये महल किसी रानी का होता था , इसके अलावा महल की दीवारों पर कुछ चीनी महिलाओं के भी चित्र है , एक समय था जब जैसलमेर से सिल्क रूट गुजरता था शायद ये चित्र उनसे जुड़े हुए है |

चन्द्र महल 

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चन्द्र महल

चन्द्रमहल जूनागढ़ के राजा और रानियों का शयनकक्ष होता था , यंहा उनके पलंग और कुर्सिया आज भी वैसे ही रखी है जैसे तब होते थे | ये पलंग ऊंचाई में मात्र एक फुट के है इसकी वजह गाइड के अनुसार ये है की अगर कोई दुश्मन इस पर सोने वाले शक्श को बंधक बनाने की कोशिश करता तो बांधे जाने के बावजूद इस पर सोने वाला शक्श पलंग के साथ खड़ा हो सकता था |

अनूप महल

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अनूप महल जूनागढ़ किले का सबसे भव्य और शायद महंगा महल है , महल की छत्त लकड़ी की है और उसपर लाल और सुनहरे रंग की शुक्ष्म कलाकारी की गई है| यंहा मौजूद एक पुराने सिंहहासन से पता चलता है की ये जगह राजा महाराजाओ के निजी बैठक का स्थान होती थी | महल का निर्माण एक जैसलमेर के निवासी ने किया था जो महाराजा करण सिंह को दक्षिण में औरंगजेब के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान मिला था |

बादल महल 

बादल महल, जूनागढ़ का किला
बादल महल ( जूनागढ़ का किला )

जूनागढ़ किले का बादल महल एक छोटा महल है जिसकी छत्त पर बादलो की चित्रकारी बनाई हुई है , इस महल को ठंडा रखने के लिए फव्वारा लगाया गया था जो की यूँ समझ लो पुराने जमाने का कूलर होता था | बीकानेर रेगिस्तान में पड़ता है इसलिए यंहा बरसात कम होती है ये महल राजकुमारों को बरसात का आनंद देने के लिए बनाया गया था | महल में भगवन कृषण और राधा के चित्र भी है साथ में भगवान राम और सीता की मुर्तिया भी जो की महल के एक आले में रखी है |

गंगा महल 

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गंगा महल जूनागढ़ किले का संघ्राह्ल्या ( म्यूजियम ) है , ये महाराजा गंगा सिंह का महल था , महाराजा गंगा सिंह बीकानेर के सबसे लोकप्रीय शाशक थे | बीकानेर के विकास में महाराजा गंगा सिंह का सबसे बड़ा योगदान था चाहे बीकानेर में रेल मार्ग बनवाना हो या नहर का निर्माण जिस से आमजन को लाभ होता था , सब महाराजा गंगा सिंह के राज में संपन हुए थे | उनके निर्माण कार्यो में गंग नहर , करणी माता मंदिर , लालगढ़ रेलवे स्टेशन और देशनोक स्टेशन आदि आते है, इस महल में उनका निजी कक्ष जहाँ उनके वस्त्र और निजी सामान रखे है |

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पहले विश्व युद्ध में इस्तेमाल होने वाला एक विमान

महाराजा गंगा सिंह ब्रिटिश सेना में जनरल थे और उन्होंने पहले विश्व युद्ध में भाग लिया था जिसके बाद उस विश्व युद्ध में उपयोग किया गया एक लडाकू विमान ब्रिटिश सरकार द्वारा गंगा सिंह जी को तोहफे के रूप में दिया था जो की इसी महल में रखा है | इन सब के अलावा यहाँ राजपरिवार की कई सारी तस्वीरो का संघ्रह भी है जो गंगा सिंह जी के राजतिलक से लेकर प्रथम विश्व युद्ध तक के समय को दिखाती है |

दीवान ऐ ख़ास / दरबार हाल 

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किले में दीवान ऐ ख़ास भी है जहाँ राजा आमजन की समस्याओ को सुनकर उनका समाधान करते थे , यहाँ बीकानेर का एक पुराना सिंघासन रखा है साथ में बीकानेर की सेना के कुछ हथियार भी है |

इन सब के आलावा गज मंदिर , सुर महल जैसी कुछ अन्य इमारते भी किले में मौजूद है , एक और म्यूजियम है जिसका नाम है प्राचीना जो की बीकानेर की रानी और राजकुमारियो के कपड़ो से लेकर उनकी साज सज्जा के सामान का संघ्रह है | समय के अभाव के चलते मै प्राचीना नहीं देख सका अगर आप जाते है तो टिकेट खिड़की से टिकेट अलग से लेकर जरूर जाएँ|

ये था बीकानेर का जूनागढ़ किला और उसके भव्य महल का विवरण अगर कोई जानकारी गलत लगे या कम लगे तो कमेंट करके बताएं अब आगे जूनागढ़ किले में घुमने जाने हेतु कुछ सुझाव और अन्य जानकारी|

जूनागढ़ किला देखने कैसे जाएँ ?

जूनागढ़ किला  शहर के बीच में बना है यहाँ तक आने के दो रास्ते है एक कलेक्ट्री चौराहा और दूसरा कोटे गेट, यहाँ कलेक्ट्री के रास्ते से आने पर भीड़ भाड़ से बचा जा सकता है और  कोट गेट के रास्ते से आने पर जाम जैसी कई समस्याए आ सकती है | अगर निजी साधन नहीं है तो ऑटो रिक्शा से यहाँ आ सकते है जिनकी दर शहर के किसी भी हिस्से से 20-25 रुपए है | ये शहर से किले तक आने की जानकारी थी अब आगे बीकानेर कैसे पहुंचे …

हवाई मार्ग – बीकानेर में 2013 में एक हवाई अड्डा बना था जो की शहर से 13 km दूर नाल गाँव में है , इस हवाई अड्डे से अभी केवल जयपुर और दिल्ली के लिए 2 उड़ान है | अगर अन्य किसी शहर से आते है तो जोधपुर हवाई अड्डा सबसे नजदीक है वहां से बस या अन्य साधन से आ सकते है \

रेल मार्ग – बीकानेर उत्तरी रेलवे मंडल का मुख्य कार्यालय है इस लिए यहाँ से भारत के हर शहर के लिए रेल सेवा उपलब्ध है |

सड़क मार्ग – बीकानेर शहर जयपुर, जोधपुर, गंगानगर से रास्ट्रीय राजमार्ग द्वारा जुड़ा है , सरकारी और निजी बस सेवा निरंतर अंतराल पर उपलब्ध है |

जूनागढ़ देखने के लिए टिकेट दर और समय

भारतीय व्यस्क पर्यटक – 50 रुपए ( केवल जूनागढ़ किला )

भारतीय विद्यार्थी – 30 रुपए  ( केवल जूनागढ़ किला )

गाइड – जूनागढ़ किले में गाइड सेवा मुफ्त है जिसमे एक बार में एक गाइड 10 पर्यटकों को घुमाने ले जाते है, अगर आप अलग से गाइड लेना चाहते है तो 250 रुपए में ले सकते है |

कार पार्किंग – 20 रुपए / कार

जूनागढ़ सुबह 10 से शाम 4.30 तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है

अगर आप कभी बरसात के मौसम में बीकानेर का जूनागढ़ किला देखने जाते है तो किले से महज 20 कदम दुरी पर बने सूरसागर पर तस्वीरबाजी करने जा सकते है | कन्टाप फोटोग्राफर किस्म के लोगो के लिए ये तालाब एक आदर्श जगह है , रात्री में बीकानेर का चाट बाजार जूनागढ़ के सामने ही लगता है जहाँ हर तरीके का फास्टफूड मिल जाता है | अदब और तहजीब के इस शहर में ये दूसरा और आखरी दिन था इसलिए जूनागढ़ किला आखरी धरोहर है बाकी की बची खुबसूरत जगह फिर कभी मौका मिला तो जरुरु देखने जाऊँगा | अब बारी बीकानेर के स्वाद से रूबरू होने की पिछली बार कचोरी चख ली थी इस बार चुन्नीलाल तंवर का शर्बत हमारी योजना में शामिल था और बीकानेर का आखरी लेख भी उसी से जुडा होगा |

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

7 thoughts on “जूनागढ़ का किला बीकानेर | The astonishing contour of palaces

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