jai vilas palace

Jai vilas palace Gwalior : Grandeur of scindia’s

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ग्वालियर के मुख्य पर्यटक स्थलों में से एक Jai vilas palace gwalior को 1874 में महाराजा जयाजी राव सिंधिया ने बनवाया था और एसा माना जाता है उस समय इस महल को बनाने में 1 करोड़ रुपए लगे थे. महल का डिजाईन सर माइकल फिलोस ने तैयार किया था, जो की उस समय मशहूर आर्किटेक्ट थे. यूरोपियन वास्तुकला शैली से बने इस महल की पहली मंजिल टस्कन शैली दूसरी मंजिल डोरिक शैली और तीसरी मंजिल को कोरिंथियन शैली का नायाब उदाहरण है.

Jai vilas palace
महल की एक झलक

Jai vilas palace gwalior में कुल 400 कमरे है जिनमे से 40 कमरों को 1964 में जया जी राव सिंधिया म्यूजियम का हिस्सा बना दिया गया था बाकी के कमरों में सिंधिया परिवार रहता है. इस ब्लॉग में मै अपनी जय विलास पैलेस यात्रा के दौरान ली गई कुछ तस्वीरे आपसे साझा करूंगा जो की सिंधिया परिवार की शानो शौकत को बयाँ करती है साथ में महल से जुडी कुछ जानकारी भी साझा करूँगा.

Pictures of Jai vilas palace  Gwalior

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जयाजी राव सिंधिया और  सिंधिया वंश के अन्य शाशक

 

Jai vilas palace Gwalior
( सरदार गैलरी ) म्यूजियम में प्रवेश करने के बाद GROUND FLOAR पर कुछ कक्ष में सिंधिया राजपरिवार का तस्वीरो का संघ्राह्लय आता है

1874 में Jai vilas palace Gwalior को राजपरिवार के रहने के लिए महल के रूप में बनाया गया था लेकिन आजादी के बाद जब रियासते खत्म कर दी गई थी तब कुछ आय के लिए 1964 में महल के 40 कमरों को म्यूजियम में तब्दील कर दिया जंहा आप उस समय के शाही परिवार के निजी कक्ष , फ्रेंच फर्नीचर, फोटो गैलरी, दरबार हाल, पहली सदी की कुछ मुर्तिया और शाही सजावट के सामान देख सकते है .

uniform ग्वालियर
राजसी वेशभूषा कक्ष

जब ग्वालियर सिंधिया परिवार के सरंक्षण में आया तब मध्य भारत के कपडा उद्योग और हथकरघा उद्योग ने नयी उंचाइयो को छुआ और इस दौरान इसे न केवल राष्ट्रिय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई. शाही वस्त्रो को उपहार सवरूप दिया जाता था लेकिन धीरे धीरे वो सब धनी वर्ग में वांछित वास्तु के रूप में लोकप्रिय हो गये. वेशभूषा को संपूर्ण करने के लिए 110 गज की पगड़ी के साथ रेशमी दुपट्टे का प्रयोग होता था.

सिंधिया राजवंश की राजसी वेशभूषा में मुख्य रूप से संकरे पायचे के पजामे और अंगरखा धारण किया जाता था और राजसी महिलाए 9 गज की नौवारी साडी पहनती थी.

Jai vilas palace Gwalior furniture
ब्रेकफास्ट रूम

 

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शाही कार्यालय

 

Jai vilas palace Gwalior के फर्स्ट फ्लोर यानि प्रथम ताल पर शाही कार्यालय, फ्रेंच और अंग्रेजी फर्नीचर से सजे कमरे, neon classic room है जिन्हें ब्रेकफास्ट रूम, dinner रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था . मैंने केवल 2 तस्वीरे साझा की है लेकिन यंहा इसे ही कई अन्य कक्ष है.

 

CHINKU BAI RAJE SCINDIA
महारानी चिंकू बाई राजे का शयन कक्ष

महारानी चिंकू बाई राजे को MIDJET QUEEN OF GWALIOR के नाम से भी जाना जाता था उनका कद 4 फुट था और वो सतारा की राजकुमारी थी जिनका विवाह माधव राज सिंधिया से 1891 में हुआ था. उनके कक्ष की सभी चीजे उनके कद अनुसार आकार में छोटी बनाई गई थी.]

Jai vilas palace Gwalior history in HINDI
Maharaja madhavrav’s suite

महाराजा माधवराव सिंधिया का कमरा उनकी निजी जिन्दगी की एक झलक देता है , कमरे में उनके वस्त्र , बूट , छड़ी और किताबे रखी है. माधवराव ने अपने शाशन काल में ग्वालियर को आधुनिक बनाने में अहम् योगदान दिया था.

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इस चांदी के रथ का निर्माण माधवराव प्रथम के काल में हुआ था , रथ के निर्माण में धातु और लकड़ी के साथ 50 किलो चांदी का प्रयोग हुआ है
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एक शाही पालकी
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ये पालकी सिंधिया राजपरिवार को मुग़ल शाशक शाह आलम द्वितीय ने उपहार सवरूप दी थी

ये पालकी 1787 में मुग़ल बादशाह के बचाव और दिल्ली में शाशक के रूप में सम्राट की बहाली के आभार में  दिए गये उपहारों का एक हिस्सा है . Jai vilas palace Gwalior में राखी इस पालकी के आधार और स्तम्ब अब अस्तित्व में नहीं है.

Jai vilas palace Gwalior का दरबार हाल

अगर इस महल के सबसे चर्चित हिस्से की बात की जाए तो वो हिस्सा है दरबार हाल , यंहा दुनिया का सबसे भारी झूमर लगाया गया है और जब इसे बनाया जा रहा था तब दरबार हाल की छत्त पर 8 हाथियों को चढाया गया था ये देखने के लिए की क्या ये छत्त इन झूम्रो का वजन झेल पाएगी या नहीं .

दरबार हाल वो जगह थी जंहा राजा और उनके दरबारी बैठक किया करते थे , इस कमरे को 560 किलो सोने से सजाया गया है और इसमें 90*48 फीट का कालीन बिछाया गया है. हाल में लगाये गये झूमर को एक ब्रिटिश कंपनी  f&c osler ने बनाया है प्रत्येक झूमर का वजन 3.5 टन है.

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दरबार हाल , दरवाजे पर लगी सुरक्षा पाबंधियो के कारण मै अच्छे से तस्वीर नहीं ले पाया

Jai vilas palace Gwalior के दरबार हाल के पास तट पट भोजन कक्ष , खाना परोसने हेतु चांदी की रेल और बिलियर्ड्स खेलने का कमरा है , बाहर लिखी जानकारी के अनुसार महल की रसोई भविष्य में पर्यटकों के देखने के लिए इस खोल दी जाएगी.

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दरबार हाल के पास मौजूद विंटेज बग्गी
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BMW कार

ये कुछ तस्वीरे थी जो मैंने Jai vilas palace की यात्रा के दौरान ली थी मैंने ग्वालियर में घुमक्कड़ी शुरुवात गूजरी महल से की थी उसके बाद ग्वालीयर दुर्ग, रानी लक्ष्मी बाई की समाधि और तानसेन मकबरा देखा . जय विलास पैलेस मेरा आखरी पडाव था और मेरी राय है इस जगह के बारे में पढने से बेहतर है आप यंहा घुमने जाए. ज्यादातर पर्यटक किला देखके ग्वालियर से चले जाते है यंहा मौजूद मकबरों और जय विलास को भीड़ भरे इलाको में होने के कारण छोड़ देते है.

सिंधिया राजपरिवार की शान शौकत यंहा मौजूद कक्ष, दरबार हाल से बयाँ होती है मेरे द्वारा ली गई कुछ तस्वीरे टेढ़ी मेढ़ी थी इसलिए केवल उपरोक्त तस्वीरे साझा की आशा करता हु आपको ये लेख पसंद आया होगा.

Jai vilas palace की कुछ अन्य जानकारी

इस महल में घूमना थोडा महंगा जरुर है लेकिन जब आप घूम लेंगे तो आपको इस बात का अफ़सोस नहीं होगा निचे टिकेट दर साझा कर रहा हु.

जय विलास पैलेस टिकेट दर-

महल के लिए दो टिकेट लगती एक प्रवेश शुल्क और दूसरी अगर आप मोबाइल ले जाना चाहते है तस्वीरे खीचने के लिए. बिना टिकेट मोबाइल को काउंटर पर जमा कर लिया जाता है.

120 rs + 100 rs  ( भारतीय )  0-5 साल के बच्चे का प्रवेश शुल्क शून्य है और अगर आप छात्र है और ID CARD लेके जाते है तो 25% छूट मिलती है.

समय – 10:00 AM TO 4:45 PM

address- लश्कर, ग्वालियर मध्यप्रदेश

Jai vilas palace Gwalior रविवार को छोड़ कर अन्य सभी सरकारी अवकाश के दौरान बंद रहता है

महल ले बारे में और पढने के लिए यंहा क्लिक करे – official website

 

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

1 thought on “Jai vilas palace Gwalior : Grandeur of scindia’s

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