Devi kund sagar, bikaner

Devi kund sagar in bikaner – A royal crematorium

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Bikaner से 8 km दूर स्तिथ Devi kund sagar उन स्मारकों में से एक है जिसे शहर के मुख्य आकर्षण का केंद्र होना चाहिए, लेकिन बदकिस्मती से बहुत कम लोग इस जगह को जानते है. ये स्मारक असल में एक शाही शमशान है, यंहा एक तालाब और बीकानेर के राजपरिवार के सदस्यों की याद में राजपूती और मुग़ल शैली में बनी छतरीयां ( cenotaph ) है. राजा, रानी, राजकुमार सबकी छतरी एक दुसरे से अलग बनावट की है जिनमे की बेहतरीन चित्रकारी की हुई है जो वर्तमान समय मे रखरखाव के अभाव में फीकी सी पड़ती जा रही है.

Devi kund sagar, bikaner
Devi kund sagar के प्रवेश द्वार से पहली झलक
 bikaner sagar
inside Devi kund sagar

Devi kund sagar Bikaner का इतिहास

Devi kund sagar को अच्छे से जानने के लिए अतीत में जाकर इसके इतिहास पर नजर डालते है, राजपूतो में छतरी बनाने का चलन काफी पुराना है लघभग 1000 साल से भी ज्यादा पुराना. जब किसी राजा या अन्य राजपरिवार के सदस्य की मर्त्यु हो जाती थी तब उनके सम्मान और याद में उनकी समाधि पर चार खम्बो के सहारे छतरी बनाई जाती थी, और उसे चित्रकारी और नक्काशी से सजाया जाता था. और ये उनके वैभव, शौर्य को दर्शाती थी, ये तो थी छतरी की बात अब बीकानेर के इस शाही शमशान घाट की बात करते है.

Devi kund sagar बीकानेर के राजपरिवार का शमशान घाट है और इस जगह को राव बीकाजी के मर्त वंशजो याद में बनाया गया था. 1571 में जब बीकानेर के 5वे महाराजा राव कल्याणमल जी की मर्त्यु हुई तब उनके पुत्र राव रायसिंह ने यहाँ सबसे पहली छतरी बनवाई थी और आखरी छतरी महाराजा करणी सिंह जी की 1988 में म्रत्यु पश्चात बनाई गई थी. 1571 से अब तक जितने भी शाही सदस्यों की म्रत्यु हुई उनके सम्मान में अलग अलग बनावट की छतरी इस जगह पर है.

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लाल छतरी
Devi kund sagar, white cenotaph
सफ़ेद छतरी

Devi kund sagar पर 17वी सदी से पहले जो भी छतरी बनाई गई वो राजपूती शैली में लाल बलुवा पत्थर से बनाई गई है, जबकि उसके बाद में मरने वाले राजा, रानिया और अन्य शाही सदस्यों की छतरी सफ़ेद संगमरमर से मिश्रित मुग़ल और राजपूत शैली में बनाई गई है. इनके अलावा यहाँ 2 समाधि राजपरिवार के उन बच्चो की है जो जन्म से पहले ही मर गये थे , उनकी समाधि पर कोई छतरी नहीं बनी हुई. बीकानेर  के 5वे महाराजा के नाम पर एक कुंड भी इसी जगह पर बना है जहाँ अंतिम संस्कार के बाद स्नान करके रस्म को पूरा किया जाता है.

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राजपरिवार के उन बच्चो की समाधि जो जन्म से निर्जीव थे

Devi kund sagar की वास्तुकला

Bikaner में मौजूद अन्य धरोहरों के मुकाबले Devi kund sagar पर बनी छतरियो की बनावट शैली में थोडा सा फर्क है , ये उनसे थोड़ी सी अलग है. हालाँकि इनको राजपूत शैली का सबसे अनूठा उदाहरण माना जाता है लेकिन इनको गौर से देखने पर मुग़ल शैली भी नजर आती है. स्मारक के चारो तरफ पत्थर की दीवार है और स्मारक के अंदर देवी का मंदिर भी है .

17वी सदी से पहले बनी छतरीयों को बनाने में लाल पत्थर का इस्तेमाल हुआ है वो राजपूती भवन निर्माण शैली से बनी है जबकि बाद में जो संगमरमर से बनाई गई उनमे मुग़ल शैली नजर आती है.

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horizontal plaque with footprints

पुरुष सदस्यों की समाधि के बीच में एक लम्बा पत्थर का टुकड़ा रखा है जिसपे उनका नाम और अन्य जानकारी लिखी है जबकि महिलाओ की समाधि पर एक क्षैतिज आकार का टुकड़ा रखा है जिसपे पैरो के निशान के साथ उनके नाम लिखे है.

Devi kund sagar bikaner की मेरी यात्रा

अभी आगरा की यात्रा खत्म करके मै bikaner गया था , यहाँ मौजूद लगभग सभी एतिहासिक धरोहरों को मै देख चूका हु लेकिन कभी Devi kund sagar के बारे में नहीं सुना था क्यूंकि ये जगह शहर से दूर है और पर्यटकों के बीच थोड़ी कम लोकप्रिय भी. खैर इस बार बीकानेर में सूर्यास्त देखने के लिए जब सबसे उत्तम जगह की खोज शुरू की तो google की दया से सागर की छतरीयों के बारे में पता चला . इक्की दुक्की तस्वीर insta पर देखी क्यूंकि यहाँ हर किसी धरोहर की एक से बढकर एक कन्टाप तस्वीर मिल जाती है.

Anoop singh chatri

जैसा की मैंने बताया ये जगह इतनी लोकप्रिय नहीं है तो जब मै पहुंचा तो कुछ  स्थानीय लोग ही नजर आये जो की अंदर बने कुंड किनारे टहल रहे थे , बीच बीच में उनकी आवाज देवी कुंड के सन्नाटे को चीर कानो में पड़ रही थी. यहाँ बनी सभी छतरियो में सबसे शानदार कला का नमूना महाराजा अनूप सिंह जी की छतरी है जो की 16 खम्बो के सहारे खड़ी है और उसके घुम्बंद पर भगवन श्री कृषण की जिन्दगी को दर्शाती मुर्तिया बनी हुई है इसके अलावा कुछ छतरी साधारण भी है .

सबसे बड़ी हैरानी की बात ये है की आज Devi kund sagar की इन छतरियो पर बनी चित्रकारी फीकी पड़ रही है शायद इनके रखरखाव पर किसी का ध्यान नहीं जाता, कुंड का पानी भी खराब हो चुका है. खैर इन सब बातो पर ज्यादा न सोचते हुए मैंने अँधेरा होने तक हर एक छतरी को देखा और सबसे ज्यादा अफ़सोस हुआ के आज से पहले इस जगह पर क्यूँ नहीं आया जबकि मै बीकानेर हर साल आता हु.

अगर आप बीकानेर को अच्छे से घूमना चाहते है तो Devi kund sagar bikaner जाए बिना भ्रमण अधुरा है इसलिए कोशिश करे सूर्यास्त के समय आप इस स्मारक को देखने जाए.

देवी कुंड सागर की कुछ अन्य जानकारी

Ticket

05 रुपए ( भारतीय पर्यटक )

10 रुपए ( विदेशी पर्यटक )

Timing

सूर्योदय से सूर्यास्त तक

Adress

Devi kund sagar, अशोक नगर रोड

बीकानेर, 334001

Read more about devi kund sagar click here 

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “Devi kund sagar in bikaner – A royal crematorium

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