भीमताल का इतिहास - नैनीताल डायरी

भीमताल का इतिहास – नैनीताल डायरी

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भीमताल का इतिहास के इस लेख से पहले मैंने नैनीताल की कुछ और जगहों के बारे में बताया था आज भीमताल  के बारे में बताऊंगा.  इस एक दिवसीय यात्रा के दौरान जब मै नैनीताल के भीड़ भाड़ भरे इलाके से 22 km दूर चीड देवदार के जंगलो में बनी सड़क पर था तो एक खुबसूरत झील दिखाई थी जिसके आसपास पर्यटकों की वही भीड़ जो नैनीताल में थी.

भीमताल का इतिहास - नैनीताल डायरी
झील का एक सुनसान किनारा

दरअसल इन दिनों में स्कूल की छुट्टिया होती है इस लिए ज्यादातर पर्यटक इन्ही दिनों में आते है वरना तो सबसे शानदार नजारे देखने के लिए अक्टूबर- नवंबर  के महीने सर्वोत्तम है. पहाड़ो के आँचल में समाई ये खुबसूरत त्रिभुजाकार झील 2 किलोमीटर लम्बी है किनारे पर एक मंदिर है और भीमताल शहर का मुख्य आकर्षण है .

महाबली भीम से जुडा है ‘ भीमताल का इतिहास ‘

boating at BHIMTAL

भीमताल का इतिहास  काफी पुराना है जिस समय कौरव और पांड्वो का युद्ध चल रहा था और पांडव जब वनवास पर थे तो सबसे बलशाली योद्धा भीम ने इस जगह पर कुछ समय व्यतीत किया था उन्ही के नाम पर इस जगह को भीमताल कहा जाने लगा . ये बात नाम से भी स्पष्ट होती है ” भीम-ताल ” . उस समय भीम ने यह रुक कर झील के किनारे भीमेश्वर महादेव मंदिर भी बनाया था.

और वर्तमान में जो मंदिर है उसे  17वी शताब्दी में कुमाऊ के राजा बाज़ बहादुर ने बनवाया था. इस बात से ये भी पता चलता है की ये शहर नैनीताल से काफी पुराना है. अब यंहा की  की झील के बारे में एक पौराणिक कहानी प्रचलित है जो की कुछ विद्वान या जो इतिहास में ज्यादा रूचि रखते है वो सही मानते है. कहते है की यंहा वास के दौरान भीम ने जमीन पर अपनी भारी भरकम गदा से प्रहार किया था उस प्रहार के बाद धरती से पानी की धारा बहने लगी और यंहा झील बन गई.

भीमताल NAKUCHIATAL
नैनीताल से भीमताल के बीच नजारे

things to do in bhimtal

यंहा से नैनीताल की दुरी लघभग 22 km. है ये काठगोदाम से अल्मोड़ा जाने वाले रास्ते पर पड़ता है इसलिए काफी समय से पर्यटक यंहा ठहरते आये है. एक नदी भी यंहा से निकलती है जो की आगे जाके बाणगंगा नदी में मिल जाती है. भीमताल  के मशहूर होने की वजह इस झील के साथ साथ पैराग्लाइडिंग और एयर बलून जैसे एडवेंचर भी है जिसके आयोजक यंहा बड़ी तादाद में है .

मै जब इस शहर में पहुंचा तब सूर्यास्त होने वाला था इसलिए इस झील के किनारे ज्यादा समय नहीं बिताया ना ही यंहा का इतिहास अच्छे से जान पाया जो कुछ बताया वो टैक्सी ड्राईवर ने बताया था इसके बाद में पैराग्लाइडिंग के लिए भीमताल nakuchiatal रोड निकल गया .

भीमताल से जुडी अन्य जानकारी

bhimtal ka itihas

कैसे जाए – भीमताल  काठगोदाम से अल्मोड़ा जाने याले रस्ते पर पड़ता है इसलिए यंहा आने के लिए बस दिल्ली , काठगोदाम नैनीताल से आसानी से मिल जाती है  इसके अलावा अगर काठगोदाम रेल से आते है या पंतनगर हवाई मार्ग से आते है तो वहां से भीमताल के लिए निजी टैक्सी ले सकते है जो की एक तरफा 1000-1500 किराया लेते है.

होटल – यंहा घुमने का सर्वोत्तम समय है शाम के समय यानी 3 बजे के बाद या फिर सुबह जल्दी,  इसके लिए भीमताल में ठहरने  के कुछ सस्ते और अच्छे होटल खालसा रेस्ट हाउस और THE PINE CREST है .

भीमताल के बारे में और अच्छे से जानने के लिए इस लेख को पढ़े –  भीमताल का इतिहास  

मेरे अन्य लेख – 1. नैना देवी मंदिर की यात्रा 

2. पैराग्लाइडिंग इन नैनीताल

points of intrest in bhimtal

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “भीमताल का इतिहास – नैनीताल डायरी

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