maqbra saadat ali

Tombs of saadat ali and khursheed zadi, lucknow

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Tombs of saadat ali khan यानि के सादत अली खान का मकबरा लखनऊ में स्तिथ वो जगह है जहाँ अवध के छठे नवाब सादत अली खान बहादुर और उनकी बेगम खुर्शीदजादी दफ़न है| दोनों के अलग अलग मकबरे है इन इमारतो को केसर बाग़ के मकबरे के नाम से भी जाना जाता है, नवाब और उनकी बेगम के अलावा उनके परिवार के कई अन्य सदस्यों की मजार भी इसी जगह है|

Saadat ali khan लगभग 16 साल तक लखनऊ के नवाब रहे थे, इन 16 सालो में नवाब ने राज काज में बड़ी नफासत दिखाई | उन्होंने लखनऊ की शानो शौकत बढाने के लिए केसर बाग़ से दिलकुश कोठी तक कई बेहतरीन इमारते बुलंद की जिनसे लखनऊ की वास्तुकला को एक नया अंदाज मिला| लखनऊ की पहली यूरोपियन शैली की इमारत कोठी हयात बक्श नवाब सादत अली की ही देन है|

Tomb of saadat ali khan
Tomb of saadat ali khan

1814 में नवाब साहब का इंतकाल हुआ और इंतकाल के बाद उनके बेटे और लखनऊ के पहले स्वतंत्र राजा गाजीउद्दीन हैदर ने ये मकबरा बनवाया था| सादत अली खान का मकबरा बनने से पहले इस जगह गाजीउदीन शहजादे की हैसियत से निवास करते थे | नवाब साहब के मकबरे के पास में ही एक छोटा मकबरा भी है जो उनकी बेगम खुर्शिद्जादी का है, ये मकबर भी गाजीउद्दीन ने बनवाया था|

लखनऊ पर नवाबो ने 80 साल राज किया और जिस समय सादत अली खान का इंतकाल हुआ उस समय लखनऊ में अंग्रेजो का आगमन हो चूका था, ब्रिटिश रेजीडेंसी का निर्माण भी उनके शाशन काल के दौरान हुआ था| अंग्रेजो ने दबाव बनाकर नये नवाब गाजीउद्दीन से 1 करोड़ रुपए अपनी सेना के लिए उधार लिए और बदले में उनको अवध का पहला स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया इससे पहले नवाब मुगलों के अधीन राज करते थे|

tomb of khursheedzaadi
tomb of khursheedzaadi

My visit to Tomb of saadat ali khan

लखौरी ईंट और चुने से बना ये खुबसूरत saadat ali khan का मकबरा लखनऊ के कम प्रशिद्ध पर्यटक स्थलों में आता है| मैंने लखनऊ जाने से पहले अच्छे से लखनऊ के बारे में पढ़ा था मगर इस मकबरे का नाम कहीं भी सामने नहीं आया| लखनऊ से दिल्ली की मेरी ट्रेन शाम को थी इसलिए मेरे पास काफी समय था घूमने का और इस से पहले दिन मैंने लखनऊ की मशहूर इमारते रूमी दरवाजा और छोटा इमामबाड़ा देख लिया था|

समय काफी था इसलिए बेगम हजरत महल पार्क से मैंने अमीनाबाद तक पैदल जाने की योजना बनाई तो उसी दौरान सड़क से मुझे ये खुबसूरत सादत अली का मकबरा नजर आया| यु आमतौर पर ये जगह हमेशा खाली ही रहती है जैसा की वहां मौजूद लोगो ने बताया, लेकिन उस दिन वहां मुस्लिम शिया सम्प्रदाय का कुछ कार्यक्रम चल रहा था| इसलिए मुझे मकबरे के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, खैर मकबरों के बारे में जानकारी वहां मौजूद लोगो से ले ली थी जो की आपसे साझा कर रहा हूँ|

entrance of sadat ali tomb lucknow
मकबरे का प्रवेश द्वार

सादत अली खान के मकबरे में प्रवेश हेतु चार दरवाजे है जो बाहर की तरफ खुलते है, इनमे से पश्चिम और पूर्व के दरवाजे उनकी बेगम और बेटियों से सम्बंधित है| पश्चिमी दरवाजे के पास उनकी तीन बेगम की कब्र है जबकि पूर्वी दरवाजे के पास दो बेटियों की कब्र है| मकबरे के अंदर का फर्श काले और सफ़ेद संगमरमर से बना है जो देखने में ऐसा लगता है मानो शतरंज की बिसात बिछी हो, भारत की कम ही प्राचीन इमारतो में ऐसा फर्श नजर आता है|

अवध वास्तुकला के नायाब उदाहरण इस चार मंजिला मकबरे की प्रत्येक कोने पर गुम्बद और मीनारे है, नवाब सादत अली और उनके भाइयो की कब्र मकबरे के तहखाने में बनी है| मकबरे के तहखाने तक आप मजार देखने जा सकते है मगर उसके लिए कुछ कीमत आपको वहां रहने वाले चौकीदार को देनी पड़ेगी| धार्मिक कार्यकर्म होने की वजह से मै तहखाने तक नहीं जा पाया लेकिन अगर आप मकबरे को देखने जाते है तो जरुर जाना| इस मकबरे के पूर्व में एक छोटा मकबरा और है जो की सादत अली की बेगम खुर्शीदजादी का है|

बेगम खुर्शीदजादी का मकबरा

खुशिदजादी का मकबरा, tomb of mushidjaadi khurshidjaadi
बेगम खुशिदजादी का मकबरा

नवाब की चार बेगम में से खुर्शीदजादी उनकी सबसे प्रिय बेगम थी, खुर्शीदजादी की मौत नवाब के जीते जी हुई थी| मकबरे का निर्माण नवाब ने खुद शुरू करवाया मगर उनके इंतकाल के बाद गाजीउद्दीन ने ही मकबरे का कम पूरा करवाया था| इसके तहखाने में दो कब्र है जिनमे एक खुर्शिद्जादी की और एक उनकी पुत्री की| मकबरे के अंदर प्रवेश वर्जित है इसलिए केवल बाहर घूम सकते है और तस्वीर ले सकते है|

रोज हजारो लोग इस मकबरे के सामने से गुजरते है मगर उनमे से कुछ ही लोग है जो इस मकबरे में दफ़न शख्स और उनकी खासियत को जानते है| केसरबाग से लेकर दिलकुश कोठी तक जितनी भी मशहूर इनायते है वो नवाब सादत अली की ही इनायत है| दिलकुश कोठी, लाल बारादरी, फरहत बक्श कोठी जैसी कई अन्य इमारते नवाब साहब की ही देन है| अगर आप लखनऊ कभी जाते है या आप लखनऊ के बाशिंदे है तो थोडा समय निकाल कर सादत अली का मकबरा देखने जाएँ| अवध की जो असल वास्तुकला है उसको देखने के लिए इस इमारत से बेहतरीन कोई अन्य इमारत शायद ही लखनऊ में मिले| मै इस बाग़ में चल रहे कार्यक्रम के वजह से मकबरे की अंदर की वास्तुकला नहीं देख पाया, खैर लखनऊ के अगले दौरे में ये कसर भी पूरी करूंगा|

कैसे पहुंचे सादत अली के मकबरा तक

अगर आप केसरबाग में है तो सादत अली का मकबरा ढूंढने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी, बेगम हजरत महल पार्क के पास में ये इमारत है| लखनऊ शहर में ola और uber की सेवा अच्छी है और गूगल मैप के जरिये आसानी से यहां तक आ सकते है|

full adress

रानी लक्ष्मी बाई मार्ग, केसरबाग ( लखनऊ 226001 )

समय– सूर्योदय से सूर्यास्त तक

एंट्री फीस – मकबरे देखने और बाग़ में घुमने पर कोई एंट्री फीस नहीं है, एक छोटी सी कीमत मकबरे की जानकारी लेने और तहखाने तक जाने के लिए देनी पड़ सकती है|

Tourist places to visit near tombs of saadat ali and khurshid zaadi

सादत अली के मकबरा के पास सफ़ेद बरदारी, हजरत महल पार्क, गोल दरवाजा और कोठी दर्शन विलास आदि कुछ जगह है जिन्हें आप देखने जा सकते है|

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

4 thoughts on “Tombs of saadat ali and khursheed zadi, lucknow

    Usha

    (October 18, 2018 - 9:33 pm)

    Just elegant!!!!!!!! 😊😊

      rao ankit

      (October 18, 2018 - 9:38 pm)

      शुक्रिया उषा जी

    Ankush usha

    (October 24, 2018 - 6:17 am)

    Your shots are just jaw dropping👌

      rao ankit

      (October 24, 2018 - 10:14 am)

      thanks usha

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