STORY OF KULDHARA VILLAGE

STORY OF KULDHARA VILLAGE – जैसलमेर का भूतिया गाँव

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क्या आपने कभी डायन देखी है ? अगर देखनी है .. तो चले जाओ कुलधरा गाँव 

( Kuldhara village ) में .

यही कोई एक या दो घंटे लगेंगे पुरे कुलधरा गाँव को घूमने में सुनसान गलियों से होकर खंडहर घरो के सामने से निकलकर डायन को खोज सकते है अगर आपकी किस्मत खराब हुई तो वो आपको दिख जायेगी. अब सोच रहे होंगे डायन या चुड़ैल क्या होती है तो डायन एक औरत/लड़की की भटकती आत्मा होती है जो कम उम्र में मर जाती है, बड़ी बड़ी आँखे जला हुआ चेहरा उलटे पैर ना जाने कितनी ही पहचान लेके डायन भटकती है .   इस लेख में ऐसी ही एक डायन की कहानी है कुलधरा गाँव की जो की जैसलमेर से 17 km दूर पश्चिम में स्तिथ है .

असल में Kuldhara village है क्या ?

आज का लेख STORY OF KULDHARA VILLAGE शुरू करने से पहले थोडा आपको कुलधरा गाँव के बारे में बता दू . सन 1291 में पाली से पलायन करके कुछ पालीवाल ब्राह्मण जैसलमेर के बाहरी इलाको में बस गये . धन दौलत और ज्ञान से भरपूर इन ब्राह्मणों ने यंहा करीब 84 गाँव बनाये . मेहनती पालीवालो के गाँव समर्ध और खुशहाल थे अठारवी सदी के मध्य तक जब तक सत्ता के नशे में चूर दीवान सलीम सिंह की नजर उनके समाज की एक लड़की पर नहीं पड़ी . कहते है जिद नुक्सान देती है आपको या फिर जिसको लेकर जिद है उसको, उसी सलीम सिंह ने भी जिद की उस लड़की को पाने की और वो समय था सत्य और धर्म का.

उस जालिम सलीम सिंह से बचने के लिए उस खुबसूरत लड़की को इस दुनिया से जाना पड़ा साथ में पुरे 84 गाँव के ब्राह्मणों को रातो रात भागना पड़ा और तब से कुलधरा खाली पड़ा है न कोई बस सकता है ना कोई बसना चाहता है क्योंकि ब्राह्मणों ने जाते जाते श्राप दिया था के ये जगह अब कभी आबाद नहीं होगी . अब आज कुलधरा गाँव के लिए जो कहानिया प्रचलित है उनमे वही लड़की एक चुड़ैल है जो की उस गाँव में किसी को बसने नहीं देती ऐसी ही एक कहानी मै आपको बताने जा रहा हु जिसकी सत्यता का प्रमाण मेरे पास नहीं है .

कुलधरा का रहस्य
वह छतरी जो शायद उस समय चौपाल होती थी और जहाँ गाँव की आखरी बैठक हुई थी 

कुलधरा गाँव की कहानी कुछ 150 साल पहले की है , शाम के समय एक चौपाल से उठकर कुछ गाँव वाले अपने मुखिया के पीछे नम आँखों के साथ अपने अपने घरो की तरफ चले आ रहे थे, कोई बैठक हुई होगी किसी दीवान जालिम सिंह के अत्याचार से बचने के लिए . लक्ष्मी ( काल्पनिक नाम ) एक खुबसूरत लड़की जिस पर वो जालिम सिंह फ़िदा था वो इन्ही मुखिया की लड़की थी जो की उस समय इन सब बातो ने दूर अपने भाई बहनों के साथ लोक गीत गुनगुनाते हुए खेलने में व्यस्त थी .

तभी एक दिल देहला देने वाली आवाज उसके कान में पड़ी और जब वो बाहर की तरफ भागी तो उसने देखा वो आवाज उसकी माँ की थी . वो समझ गई के जरुर कुछ गलत हुआ है अनहोनी कोई , वो अपने भाई-बहन को सम्भालने के लिए वापस अंदर  भागी तो आस पडोस की कुछ और औरते उनको अपने गोद में लेकर घर से बाहर भाग रही थी . अब वो सहम गई और घर से बाहर निकलने लगी तो घर का दरवाजा बंद हो गया किसी ने घर में ही कैद कर दिया और ये करने वाले थे उसके पिता यानी के मुखिया .

कुलधरा का इतिहास
मुखिया का वो घर जहाँ लक्ष्मी ने आखरी सांस ली थी

पिता दरवाजे के पास बैठकर फूट फूट कर रो रहे थे क्यूंकि आज की चौपाल में सबने मिल कर फैसला लिया है की लक्ष्मी (काल्पनिक नाम ) को उस जालिम सिंह के हाथो सौपने से अच्छा उसे जिन्दा जला देंगे ताकि सम्मान बचा रहेगा . यु जिन्दा आग में सम्मान की रक्षा के लिए जल जाना सती या जौहर ही कहलाता है . अब इस जौहर की नौबत क्यों आई ?

पालीवाल ब्राह्मण paliwal brahman
मुखिया के घर के अंदर के वो कमरे जिसकी दीवारों ने वो भयानक रात देखी है

दरअसल जालिम सिंह जैसलमेर का एक दीवान था जो की कुर्र परवर्ती का इंसान था उसने लक्ष्मी को कुलधरा गाँव में देख लिया और उस से शादी की जिद बना बैठा था ब्राह्मणों ने अस्वीकार कर दिया ये रिश्ता क्युकी जालिम सिंह एक निचले बिरादरी का इंसान था माँसाहारी . तब अंत में गाँव वालो के न मानने पर जालिम ने धमकी दी के वो सबको मार देगा अगर पूर्णिमा से पहले ये लडकी उसको नहीं मिली अत: लक्ष्मी के पिता और समस्त 84 गाँव के ब्राह्मणों ने बैठक की और निर्णय लिया की लक्ष्मी को आग के हवाले करके गाँव खाली कर देंगे .

रोती हुई लक्ष्मी मरने से पहले खूब चिल्लाई होगी पर एक एक कर गाँव छोड़ रहे ब्राह्मण परिवारों ने चाहते हुए भी उसे बाहर निकालने की कोशिश नहीं की . और उसी रात कुलधरा गाँव समेत आसपास के 84 गाँव के ब्राह्मण परिवार जालिम सिंह से बचकर निकल गये और कहाँ गये इसका किसी को पता नहीं . लेकिन जाते हुए दुखी ब्राह्मणों ने श्राप दिया के इस गाँव में अब कोई नहीं रह पाएगा ये सुनसान और उजाड़ रहेंगे .

haunted village jaisalmer,
पलायन के समय पालीवाल ब्राह्मण इस बैलगाड़ी को इसे ही छोड़ गये जो आज भी वैसे ही है

ये थी वो काल्पनिक कहानी आज भूतिया कहे जाने वाले कुलधरा गाँव की जो कई सालो से यंहा सुनाई जाती है अलग अलग तरीके से कोई अधूरी सुनाता है तो कोई बिलकुल अलग क्यूंकि कुलधरा गाँव की कहानी असल में क्या है इसका  कोई प्रमाण नहीं है . इन कथाओं गाँव में घुमने वाली चुड़ैल भी वो ही लक्ष्मी है .

Kuldhara village घूमने जाना चहिये या नहीं

top haunted place in india 2018

आज के दिन में कुलधरा को राजस्थान टूरिज्म ने अपने नियंत्रण में लेकर उसकी देख रेख का कार्य शुरू कर दिया है यानी एक पर्यटक स्थल बन गया है Kuldhara village यंहा की टिकेट है 10 रुपए और भूत / चुड़ैल मिलने के कई किस्से सुनने में आयें है लेकिन कोई ठोस दावा नहीं इसलिए घूमने के लिए जाना उचित है ये देखने की उस समय के धनी और ज्ञानी ब्राह्मणों ने कैसे इन गाँवों को बसाया था यंहा का वातावरण और घरो को बनाने की तकनीक ताकि गर्मी में भी गर्म न रहे. कुलधरा का इतिहास इन खंडहरों की बनावट से बयाँ होता है .

कैसे पहुंचे

streets of kuldhara
कुलधरा गाँव के खंडहर मकान

Kuldhara village जैसलमेर से 17 km दूर एक वीरान हिस्से में पड़ता है वहां तक पहुचने के लिए कोई बस या अन्य साधन नहीं है , खुद के निजी साधन से ही वहां तक जाया जा सकता है . जाने के लिए सड़क मार्ग अच्छी हालत में है .

तो ये था STORY OF KULDHARA VILLAGE – जैसलमेर का भूतिया गाँव का मेरा लेख, आशा करता हु आपको अच्छा लगा होगा . कमेंट जरुर करे

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सोनार किला 

 

 

 

 

 

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

4 thoughts on “STORY OF KULDHARA VILLAGE – जैसलमेर का भूतिया गाँव

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