PATWAON KI HAVELI

Patwaon Ki Haveli Jaisalmer – एक दिलचस्प धरोहर

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समय से लघभग 200 साल पीछे जाएँ तो सन 1805 में जैसलमेर के व्यापारी गुमान चाँद पटवा ने एक जैन पुजारी की सलाह पर जैसलमेर किले से कुछ दुरी पर हवेलियों का निर्माण शुरू किया, और अगले 4 दशक तक अपने 5 बेटो के लिए अलग अलग हवेलियाँ बनवाई जो की आज Patwaon Ki haveli के नाम से जानी जाती है . ये हवेलियाँ आज के दौर में PLACE TO VISIT IN JAISALMER की सूचि में दर्ज है और एक मुख्य पर्यटन स्थल है .

कौन थे PATWAON KI HAVELI के मालिक

patwaon ki haveli jaisalmer owner
जीवन लाल कोठारी जिन्होंने नौकरों से हवेली खरीद ली थी

Patwaon Ki haveli को बनाने वाले गुमानचंद पटवा जैसलमेर के एक बहुत बड़े व्यापरी थे जो की सोने चांदी के काम के साथ साथ ब्याज पर बड़ी रकम देने तक का भी काम करते थे . उन्नीसवी सदी के शुरुवात तक ये हवेली जैसलमेर में पटवो के व्यापार का मुख्य केंद्र थी सारे फैसले इन्ही हवेलियों में लिए जाते थे.

लेकिन पटवा परिवार 19वी सदी के शुरुवात में इन हवेलियों को नौकर के भरोसे छोड़ कर व्यापार के लिए कही और पलायन कर गये . धीरे धीरे इन हवेलियों पर नौकरों ने कब्ज़ा कर लिया और इन्हें जीवन लाल कोठारी नाम के व्यापरी को बेच दिया . इसलिए बाद में इनका नाम Kothari’s patwaon ki haveli पड़ गया.

Patwao ki haveli की वास्तुकला और उनकी सैर

पटवा हवेली जैसलमेर इतिहास
पांच मंजिला हवेली की एक झलक

जैसलमेर की तंग गलियों में बनी इन पांच मंजिला Patwaon Ki haveli को राजपूत और इस्लामी शैली से बनाया गया है . इस्लामी शैली में बनाने का विचार उन इस्लामी देशो से आया जो की उस दौरान जैसलमेर से गुजरने वाले सिल्क रूट पर पड़ते थे.

हवेलियों को जैसलमेर के प्रशिद्ध पीले पत्थरों से बनाया गया है , आज के इस लेख में मै आपको इन पांच हवेलियों में से एक की सैर करवाऊंगा जो की आज के समय में सबसे अच्छी हालत में है .

पटवो की हवेली हिस्ट्री इन hindi
विशाल मुख्य द्वार

तो जब हम तंग रस्ते से होकर विशाल दरवाजे से Patwaon Ki haveli के तरफ प्रवेश करते है तो सबसे पहली हवेली आती है जो की एक संग्राहलय है और इन पांच पटवो की हवेली में सबसे बड़ी भी है .

इस हवेली का पहला हिस्सा एक बैठक होती थी, विलासिता से परिपूर्ण इस कमरे में अतिथियों के साथ पटवा सेठ व्यापारिक जानकारी साझा करते थे और अन्य सौदे तय करते थे. और जैसे इस हवेली में आगे बढ़ेंगे यहाँ की नक्काशी के साथ साथ दीवारों के पीछे बनी गुप्त तिजोरिया आपका मन मोह लेंगी.

जैसलमेर में पटवो की हवेली

हवेली में उस समय के एशो आराम के सारे उपकरण आज भी ज्यों के त्यों रखे है . उस दौर के मिटटी तेल से चलने वाले पंखे , फ्रिज के साथ साथ सोने के बर्तन, सिक्के आपका मन मोह लेते है.

old dressing room
हवेली में मौजूद श्रृंगार भवन जहाँ पटवा और उनका परिवार सजता था
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भोजन कक्ष जहाँ सोने चांदी के बर्तन भी है

आज के समय में ये पटवो की हवेलिया पुरात्तव विभाग के अधीन है , इन पांच में से केवल दो हवेली ही बची है जहाँ आप घूम सकते है बाकी की हवेली देखरेख सही से न होने कारण बंद है . उनका किसी भी समय ढह जाने का खतरा मंडराता रहता है .

GOLDEN FORT view JAISALMER HINDI
हवेली से दिखता सोनार किला

टिकट एवं अन्य जानकारी

टिकेट दर भारतीय नागरिक – 50 रुपए

समय – 9 बजे से 5 बजे तक

Patwaon Ki haveli तक आप ऑटो के जरिये आ सकते है क्यूंकि रास्ता थोडा सा तंग है इसके अलावा गाइड यहाँ के स्थानीय लोग है जो की पर्यटक मौसम के आधार पर कीमत लेते है हम गर्मी में गये थे तो दो हवेली के लिए 50 रुपए कीमत देनी पड़ी जो की सैर के बाद वाजिब लगी क्यूंकि गाइड बिना लालच के अच्छी जानकारी देते है .

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जैसलमेर के अन्य यात्रा चिट्ठे

golden फोर्ट

gadisar lake

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

3 thoughts on “Patwaon Ki Haveli Jaisalmer – एक दिलचस्प धरोहर

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