टुंडे कबाब, चौक लखनऊ

Lucknow Food Blog: टुंडे कबाब और इदरीस की बिरयानी

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नफासत के शहर लखनऊ में जब street food का जिक्र होता है तो हजरतगंज इलाके का नाम सबसे पहले आता है, हजरतगंज में एक खुबसूरत बाजार है जहाँ के टुंडे कबाब और इदरीस की बिरयानी पिछले कई दशको से पुरे विशव में प्रशिद्ध है, बाजार का नाम है चौक बाजार| चौक बाज़ार अपने अंदर अवध का इतिहास समेटे पुराने लखनऊ में अकबरी दरवाजे से गोल दरवाजे तक यही कोई 500-700 मीटर के दायरे में फैला है|

आजकल जाम के मारे इस बाजार में पिछले कई सालो में काफी बदलाव आया है मगर यंहा मिलने वाले अवधी खाने का स्वाद वही है जो नवाबो के दौर में होता था| लखनऊ जाने वाले पर्यटकों में शायद ही कोई एसा पर्यटक होगा जिसे यंहा मिलने वाले अवधी खाने और चाट का जायका ना पसंद हो| मुझे इस बार लखनऊ भ्रमण के दौरान मौका मिला चौक जाकर टुंडे कबाब और इदरीस की बिरयानी खाने का, टुंडे कबाब खाने में जितने स्वादिष्ट  है उसका इतिहास उतना ही रोचक है जो की इस लेख में मै आपको बताऊंगा|

टुंडे कबाब, lucknow street food
टुंडे कबाब वाले
चौक बाजार लखनऊ
रूमी दरवाजे से चौक बाजार को जाती सड़क

मै बड़े इमामबाड़े से पैदल जब चौक की तरफ चला तो सूर्यास्त होने वाला था और जैसा मैंने चौक के बारे में सुना था की शाम ढलते ढलते चौक और भी जवान हो जाता है, बिलकुल सच बात निकली| लोग दिन भर की थकान के बाद लखनवी स्वाद का लुत्फ उठाने चौक बाजार में उमड़ पड़े, कश्मीरी चाय के साथ समोसा, बिरयानी और गोलगप्पे खाने वालो की जबरदस्त भीड़| शाही टुकडो की लज्जत चख रहे लोग टुंडे कबाब  और इदरिस की बिरयानी  के चटखारे ले रहे थे|

मुझे चाट खाने का शौख कम है इसलिए मै चौक चौराहे पर रुकने की बजाय टुंडे कबाब वाले की तरफ चल पड़ा| लेकिन टुंडे कबाब से 500-700 मीटर पहले एक छोटी सी दूकान आती है ‘ इदरीस की बिरयानी’ |

जिसका नाम पढ़ते ही एक गीत याद आया जो डॉ. सुनील जोगी ने लिखा है की

तुम इदरीस की बिरयानी हो मै कंकड़ वाली दाल प्रिये , मुश्किल है अपना मेल प्रिये ये प्यार नहीं कोई खेल प्रिये

मैंने 5 साल पहले जब पहली बार ये गीत सुना था उसी वक्त से इदरीस की बिरयानी मेरे दिमाग में घूम रही थी हालाँकि मै नहीं जानता था के ये क्यूँ मशहूर है इतनी|  खैर मै 5 साल बाद मै उसी दूकान के सामने खड़ा था, एक साधारण सी दूकान उसमे बैठने को कुछ कुर्सी और एक बड़ी सी मेज, बाहर चूल्हे पर पकती बिरयानी|

इदरीस की बिरयानी

इदरीस बिरयानी लखनऊ
इदरीस बिरयानी

इदरीस की बिरयानी

इदरीस की बिरयानी की ये दूकान 1968 में मोहम्मद इदरीस नाम के एक शक्श ने  शुरू की थी, उनके पिता उस समय लखनऊ के एक जाने माने बावर्ची ( COOK ) थे और उनसे ही उन्होंने ये ख़ास बिरयानी बनानी सीखी थी| अभी हाल में इदरीस भाई के बेटे मोहम्मद हमजा दूकान सम्भालते है, उनके अनुसार बिरयानी का एक डेग ( पतीला ) तैयार होने में 3 घंटे लगते है और दिन में 20 डेग बनाये जाते है| तांबे के डेग में बिरयानी को कोयले के चूल्हे की धीमी आंच पर पकाया जाता है और उसमे हलके मसाले और दूध, मलाई मिलाई जाती है जो इसके स्वाद का राज है| दूकान में बैठकर खाने की व्यवस्था अच्छी नहीं है सो मैने बिरयानी तो नहीं खाई मगर उनसे 2-3 मशहूर वैरायटी पूछ ली जिनमे से एक है दम बिरयानी और एक मटन बिरयानी| मटन बिरयानी को बनांते समय उसमे जाफरानी और मक्खन मिलाया जाता है बाद में उसे कोरमा और प्याज के साथ परोसा जाता है जो इसके स्वाद को और बढ़ा देते है| मटन बिरयानी ही यंहा सबसे बिकने वाली बिरयानी है अगर आप कभी जाते हो इनकी दूकान पर तो पैक करा कर घर या होटल पे ले जा कर खा सकते है अन्यथा दूकान पर खाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है |

इदरीस की बिरयानी न खा पाने के अफ़सोस के साथ मै विशव प्रशिद्ध टुंडे कबाब वाले की तरफ चल पड़ा, टुंडे कबाब का इतिहास भी काफी रोचक है |

टुंडे कबाब

टुंडे कबाब, रुमाली रोती
टुंडे कबाब और रुमाली रोती

मुह में रखते ही पिंघलने वाले टुंडे के कबाब की कहानी सदी भर पुरानी है, उस दौर में लखनऊ पर नवाब राज करते थे , नवाब साहब को कबाब बहुत पसंद थे मगर उनकी ढलती उम्र ने उनके दांतों को कमजोर कर दिया जिसकी वजह से वो अपने पसंदीदा कबाबो का लुत्फ नहीं उठा पा रहे थे| इस ढलती उम्र और कबाबो की आशकी ने नवाब साहब को एक अनोखा मुकाबला करवाने के लिए मजबूर कर दिया| मुकाबला कुछ यूँ था के अवध और आसपास के सभी बावर्चियों को कहा गया की जो सबसे मुलायम और रसीले कबाब बनाएगा उसे नवाब साहब द्वारा शाही नजरानो और तोहफों से सम्मानित किया जाएगा| मुकाबला शुरू हुआ आसपास के इलाके से कई बावर्ची आये और सबने कबाब बनाये मगर उस मुकाबले को एक शक्श ने जीता जिनका नाम था हाजी मुराद अली | हाजी साहब के कबाब नवाब को सबसे मुलायम और बेहतरीन लगे और उसी दिन से वो कबाब अवध में मशहूर हो गये, अब उन कबाब को टुंडे नाम देने के पीछे भी एक कहानी है| जैसे किसी इंसान की एक टांग नहीं होती तो उसे लंगड़ा कहा जाता है वैसे ही जिस इंसान के एक हाथ नहीं होता उसे टुंडा कहा जाता है| हाजी मुराद साहब के एक हाथ नहीं था इसलिए उनके द्वारा बनाये गये इन कबाबो का नाम पड़ा टुंडे के कबाब|

टुंडे कबाब वालो का सबसे मशहूर कबाब है गलावटी कबाब, गलावटी का मतलब होता है मुलायम | स्वाद का राज ज्यादा नहीं मालुम पड़ा पर इतना पता चला की  150 ख़ास मसालों के साथ पपीता का इस्तेमाल इन कबाब को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है| पर्यटकों के अलावा कई बॉलीवुड की हस्तिया जो खाने के शौक़ीन है वो भी टुंडे कबाब का लुत्फ उठा चुके है|

इदरीस की बिरयानी और टुंडे कबाब के अलावा भी चौक बाजार में कई अन्य अवधी व्यंजन है जो दुनिया भर में प्रशिद्ध है जैसे की निहारी कुलचा जो की लखनऊ का पसंदीदा नाश्ता है | चौक बाजार में शाकाहारी लोगो के लिए भी कई विकल्प है  जैसे की मक्खन मलाई, दौलत की चाट और लब-ऐ-मशूक |

टुंडे कबाब की दूकान का पता

151, फूल वाली गली

चौक, लखनऊ (उ.प्र )

चौक बाजार लखनऊ, अमीनाबाद
पुराने लखनऊ की गलियाँ ( tough looks )

शाम का समय चौक घूमने के लिए सर्वोतम समय है, लखनऊ का चौक बाजार काफी व्यस्त इलाका है इसलिए यहाँ मिलने वाला street food ज्यादा स्वच्छ नहीं होता ज्यादातर दुकानों पर सबके सामने उनको पकाया जाता है और कई बार देखने से ही दिल भर जाता है इसलिए कोशिश करके एक दिन के लिए स्वच्छता को नजर-अंदाज कर लखनऊ के जायको का चटखारा ले सके|

दिन में रूमी दरवाजा और इमामबाड़ो को देखने के बाद चौक में सफ़र का अंत करना मेरे लिए वाकई में एक यादगार दिन बन गया अगर कभी फिर से लखनऊ जाने का मौका मिला तो जरुर अन्य व्यंजन भी चख कर देखूंगा| हो सकता है लेख में मैंने जानकारी कम दी होगी क्यूंकि मुझे food ब्लॉगिंग का अनुभव काफी कम है इसलिए चौक बाजार से जुड़ा कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बता सकते हो|

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

1 thought on “Lucknow Food Blog: टुंडे कबाब और इदरीस की बिरयानी

    Usha

    (October 5, 2018 - 4:07 am)

    Marvellous,,, nice try. I am no fond of biryani or kabab but after reading astonishing story behind,,,,, I will try …….

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