लालगढ़ पैलेस बीकानेर history

Lalgarh palace bikaner : एक शाही होटल और संग्राहलय

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ये यात्रा चिट्ठा है बीसवी सदी के शुरुवात में बने एक भव्य महल का जिसे की ब्रिटिश नियंत्रित रीजेंसी द्वारा बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह के लिए बनवाया था . क्युकी महाराजा गंगा सिंह को लगता था की जूनागढ़ उनके आधुनिक जमाने के राजकुमार के लिए उपयुक्त जगह नहीं है . इस ईमारत का नाम उन्होंने अपने पिता महाराजा लालसिंह की याद में Lalgarh Palace Bikaner रखा .

Lalgarh palace bikaner

Lalgarh palace bikaner, लालगढ़ महल

आजादी के बाद जब सभी रियासते खत्म कर दी गई थी , बीकानेर के महाराजा करणी सिंह ने महाराजा गंगा सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट को चलाने के लिए इस जगह के दो हिस्सों को एक भव्य होटल में तब्दील कर दिया ताकि ट्रस्ट चलाने के लिए आय आती रहे , Lalgarh palace bikaner के  एक हिस्से को म्यूजियम बना दिया गया और एक हिस्सा शाही परिवार के घर के रूप में इस्तेमाल होने लगा  . आज के समय में बीकानेर की राजकुमारी राज्यश्री कुमारी इस लालगढ़ होटल को चला रही है . लाल पत्थरों से इस्तेमाल से बनी इस भव्य इमारत का डिजाईन सर स्विंटन जैकब द्वारा बनाया गया है जो की भारतीय , यूरोपीय और मुग़ल शैली का एक अनूठा उदाहरण है .

lalgarh palace bikaner museum

Lalgarh palace के पश्चिमी छोर पर सादुल सिंह म्यूजियम है जिसमे की बीकानेर रियासत की कुछ वस्तुए , तस्वीरे , ट्राफी और शाही घराने द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रेलवे कोच रखी है |

म्यूजियम में प्रवेश करते ही सामने बीकानेर की पहली रेल का एक कोच रखा हुआ है जिसे महाराजा गंगा सिंह अपने परिवार के इस्तेमाल के लिए बीकानेर लाये थे न जाने कितने ही सालो से वो भी इन दीवारों के पीछे कैद है |

Lalgarh palace bikaner, लालगढ़ बीकानेर
लालगढ़ म्यूजियम

लघभग पचास-अस्सी के दशक में बीकानेर के महाराजा रहे अर्जुन अवार्ड विजेता डाक्टर  करणी सिंह जी शिकार और निशाने बाजी के शौक़ीन थे उन्होंने 1988 में म्रत्यु से पहले आखरी बार 198० में सोवियत रूस में हुए ओलिंपिक खेलो में भाग लिया था . उनके द्वारा निशानेबाजी में  जीती गई ट्राफी और मैडल भी लालगढ़   म्यूजियम में रखी है |

dr karni singh

सादुल सिंह म्यूजियम में दुनिया चौथा निजी पुस्तकालय भी है इस म्यूजियम का कला संग्रहालय बीकानेर के महाराजाओ को समर्पित है जिसमे की महाराजा गंगा सिंह , करणी सिंह और सादुल सिंह के शामिल है . म्यूजियम में पर्यटकों को पर्दर्शित करने हेतु जार्जियाई तस्वीरे , क्लाकर्तिया और शिकार में जीते हुए इनाम मौजूद है 

 

lalgarh museum bikaner

museum का प्रत्येक हिस्सा अलग अलग राजाओ के जीवन उनके वीर कर्मो को दर्शाता है |

बीकानेर का राज परिवार तस्वीरे खींचने का शोक्कें रहा है यहाँ इस म्यूजियम में सत्तर के दशक के बेहतरीन कैमरे और विडियो प्लेयर भी रखे है जिन्हें शायद ही आज की पीढ़ी ने कही देखा होगा |

vintage camera bikaner

 

vintage video player

 

लालगढ़ पैलेस में शिकार के पश्चात ली गई कुछ तस्वीरे ऐसी भी है जिसे देख कर शयद आपका मन यंहा के राजाओ के प्रति नफरत से भर जाये क्युकी भारत के लघभग सभी रियासतों के राजा शिकार को वीरता का काम मानते थे शेर चीता मारने पर उनको अव्वल दर्जे का शिकारी माना जाता था खैर उस जमाने में ये सब काम शोकिया तौर पर होते थे और जानवरों की संख्या अधिक होने पर वो जान माल का नुक्सान भी करते थे तो ये सब कोई अपराध नहीं था महज एक खेल था |

Lalgarh palace bikaner, लालगढ़
राजकुमार करणी सिंह जी डूंगरपुर रियासत में शिकार के दौरान मारे गये पैंथर के साथ . L to R – ठाकुर जगमाल सिंह , महाराजा वीरभद्र सिंह , राजकुमार करणी सिंह और महारावल लक्ष्मण सिंह जी |

 Lalgarh palace bikaner में बने इस सादुल सिंह म्यूजियम में इसके अलावा राजघराने से जुडी कई और यादे आज भी सम्भाल कर रखी हुई है ये म्यूजियम गंगा सिंह ट्रस्ट द्वारा संचालित है |

घूमने का समय

सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे ( रविवार को बंद )

कैसे पहुंचे लालगढ़ पैलेस

लालगढ़ बीकानेर किले से 3 किलोमीटर, बीकानेर रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर और बस स्टैंड से लघभग 3 किलोमीटर दुरी पर है यंहा तक आने के टैक्सी या ऑटो ही उपलब्ध है अगर आपके बस दुपहिया वाहन या कोई निजी साधन नहीं है .

टिकेट दर

भारतीय पयटक – 25 रुपए

बीकानेर के बारे में और ब्लॉग पढने के लिए यंहा क्लिक करे

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “Lalgarh palace bikaner : एक शाही होटल और संग्राहलय

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