जामा मस्जिद लखनऊ, हुसैनाबाद

जामा मस्जिद लखनऊ: एक खुबसूरत नवाबी मस्जिद

Spread the love

जामा मस्जिद का जब भी जिक्र होता है तो हमारे दिमाग में पुरानी दिल्ली की वो लाल जामा मस्जिद दौड़ने लग जाती है , लेकिन उसके अलावा भी देश में कई जामा मस्जिद है| एक जामा मस्जिद लखनऊ में भी है जिसकी वास्तुकला बेहद खुबसूरत है| छोटा इमामबाडा के पीछे हुसैनाबाद इलाके में बनी इस जामा मस्जिद  को जामी मस्जिद भी कहते है, नवाब हुसैन अली शाह ने इसे 1839 में बनवाना शुरू किया था मगर उनकी अचानक मौत हो जाने से इसका निर्माण 1845 में पूरा हो सका| उनकी मौत के बाद मस्जिद का निर्माण कार्य उनकी बेगम मल्लिका जहान ने पूरा करवाया था|

अगर नवाब हुसैन अली की मौत न होती तो लखनऊ की जामा मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद से बड़ी होती उनका मस्जिद बनाने का इरादा भी यही था| हालाँकि आकार को नजरअंदाज कर दे और कारीगरी पर ध्यान दे तो ये मस्जिद अन्य जामा मस्जिदों से सुंदर है, महीन चूने की कारीगरी इस मस्जिद की सुन्दरता में चार चाँद लगाती है | मैंने दिल्ली की जामा मस्जिद देखी है उसे मुगलों ने लाल पत्थर से बनवाया है जबकि लखनऊ की जामा मस्जिद एक चबूतरे पर लखौरी ईंटो और चूने से बनाई गई है| लेकिन ये सुंदर कारीगरी आप तभी देख पायेंगे अगर आप नमाजी है , अगर गैर नमाजी है तो बाहर से वापस जाना पड़ेगा इसकी वजह लेख में आगे आपको बताता हु पहले मस्जिद की कुछ तस्वीरे|

जामा मस्जिद लखनऊ, हुसैनाबाद

jaama masjid lucknow
प्रवेश द्वार

जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दू जामा मस्जिद शहर की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिद को कहा जाता है , इनके असल नाम अलग होते है जैसे दिल्ली की जामा मस्जिद का नाम मस्जिद-ऐ-जहानुमा है|

दिल्ली की जामा मस्जिद में मैंने देखा है की लोग इबादत के वक्त भी जा सकते है चाहे वो किसी भी धर्म के हो मगर लखनऊ की जामा मस्जिद में मस्जिद के अंदर तो दूर चबूतरे पर भी नहीं जाने दिया जाता| इसके पीछे एक वजह है जो लखनऊ में नहीं जान सका मगर अजमेर में एक मेरे मुस्लिम मित्र से जान ली| मस्जिद में प्रवेश करने के कुछ कायदे है नियम है जैसे हाथ पैर धोकर जाना, शरीर घुटने तक लम्बे कपडे से ढका हो, इबादत के वक्त बोलना नहीं चहिये ऐसे कुछ नियम होते है| अब गैर नमाजी व्यक्ति इन सब बातो पर ध्यान नहीं देते वो इन नियमो का उल्लंघन कर देते है जिस से धार्मिक भावना को ठेस पहुँचती है| मस्जिद केवल एक इबादत करने की जगह नहीं होती न ही वो कोई पर्यटन स्थल है , पैगम्बर मुहम्मद साहब के दौर में मस्जिद में स्कूल चलाया जाता था तालीम दी जाती थी  वो मस्जिद में अपने मंत्री मंडल से बैठके करते थे और तो और कैदियों को भी रखा जाता था| अब जिस जगह को उनके जमाने में इतना ऊँचा दर्जा मिला हो उसके नियम कायदों का हम उल्लंघन करे तो गलत बात है इसलिए लखनऊ की जामा मस्जिद में केवल नमाजी व्यक्ति को ही जाने दिया जाता है| इसके पीछे और भी कोई वजह हो तो मै कुछ कह नहीं सकता बाकी मुझे जो मालुम चला वो मैंने साझा किया है|

आशा करता हु कभी इस जामा मस्जिद के अंदर जाने का मौका मिले और वो छत्त पर बनी चित्रकारी जिसका जिक्र हर लखनवी के मुह से होता है को देख सकू|

लखनऊ मस्जिद
जामा मस्जिद की भव्य मीनार

लखनऊ की जामा मस्जिद की कुछ अन्य जानकारी

CHOTA IMAMBADA TO JAMA MASJID
छोटे इमामबाड़े से मस्जिद की और जाता रास्ता

लखनऊ की जामा मस्जिद छोटे इमामबाड़े के पश्चिम में स्तिथ है, आसानी से पैदल जाया सकता है| दूरी होगी कोई 800 मीटर के करीब और पैदल चलके जाना ही सर्वोत्तम है क्यूंकि रास्ता भीड़ भाड़ भरा है|

समय– सुबह 8 बजे से

इबादत का समय – दिन में 5 बार ( इनका समय मस्जिद में पता करे )

अगर आप लखनऊ जाते है और नमाजी है तो लखनऊ की जामा मस्जिद  में जरुर जाना असली सुन्दरता मस्जिद की अंदरूनी छत्त पर आपको देखने को मिल जायेगी|

 

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “जामा मस्जिद लखनऊ: एक खुबसूरत नवाबी मस्जिद

    Usha

    (September 25, 2018 - 11:32 am)

    Gripping statics,,,,

      rao ankit

      (September 25, 2018 - 1:34 pm)

      Thnku Usha ji

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.