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जामा मस्जिद दिल्ली: शाहजहां द्वारा निर्मित आखरी लाल इमारत

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सत्रहवीं सदी में जब शाहजहां हिंदुस्तान के बादशाह थे तब वो अपने निवास स्थान लाल किले के पास इबादत करने के लिए एक जगह चाहते थे जहाँ ज्यादा से ज्यादा लोग एक साथ आकर नमाज पढ़ सके | उनकी इसी इच्छा के तहत उस्ताद खलील खान ने एक बड़ी सी मस्जिद का नक्शा तैयार किया जो की आज के समय में जामा मस्जिद दिल्ली के नाम से जानी जाती है | जामा मस्जिद  को निर्माण 1644 में शुरू हुआ और 5000 मजदूरों की कड़ी मेहनत के बाद 1656 में पूरा हुआ | ऐसा बताया जाता है की उस जमाने में ये मस्जिद दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक थी और कुछ साल औरंगजेब ने भी हूबहू मस्जिद लाहौर में बनवाई जिसे नाम दिया गया बादशाही मस्जिद |

जामा मस्जिद अन्य मस्जिदों से काफी अलग थी इसलिए मस्जिद के पहले इमाम भी ख़ास बुलाये गए जो की उज़्बेकिस्तान के एक शहर बुखारा के निवासी थे, आज भी मस्जिद में इमाम का काम उनका ही परिवार करता है और उन्हें बुखारी के नाम से जाना जाता है | मस्जिद के निर्माण के कुछ वर्षो बाद शाहजहां का इन्तेकाल हो गया था , शाहजहां को हिंदुस्तान में उनकी शिल्प कला और वास्तुकला में रूचि के लिए जाना जाता था| आगरा का ताजमहल और दिल्ली के लाल किले का निर्माण भी शाहजाहाँ ने ही करवाया और ये दिल्ली की जामा मस्जिद उनका आखरी निर्माण कार्य था |

huge entrance gate of jama masjid
भव्य प्रवेश द्वार
jama masjid delhi hindi
जामा मस्जिद दिल्ली
dome at masjid
मस्जिद के गुम्बद पर डूबते सूरज की किरणे

जामा मस्जिद दिल्ली की वास्तुकला

उस्ताद खलील खान ने जामा मस्जिद का निर्माण 30 फुट ऊँचे एक चबूतरे पर किया है जो की लाल पत्थर से बना है, मस्जिद को बनाने के लिए भी लाल पत्थर का इस्तेमाल हुआ है| दरअसल मुग़ल बादशाह लाल पत्थर के मुरीद थे और यही आगे चलकर उनकी वास्तुकला की पहचान बना था, मुगलो द्वारा बनवाई गयी लगभग सभी इमारते लाल पत्थर से ही बनी है| मस्जिद में प्रवेश हेतु तीन द्वार है और तीनो ही आम लोगों के लिए खुले है, इन तीनो में से सबसे मशहूर पूर्वी द्वार है जिसका इस्तेमाल खुद शाहजहां करते थे| मस्जिद की दोनों और 130 फ़ीट ऊँची मीनारे है जिनमे से एक मीनार आम जान के लिए खुली है और 50 रुपए का टिकट लेकर आप उसमे ऊंचाई से दिल्ली शहर का नजारा देख सकते है |

द्वार से प्रवेश के बाद एक विशाल प्रांगण आता है जिसके बारे में एक अंदाजे के अनुसार बताया जाता है की दिल्ली की जामा मस्जिद के इस विशाल प्रांगण में एक समय में लगभग 25000 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते है | मस्जिद का मुख्य इबादतखाना एक दम साधारण है जहाँ फर्श संगमरमर से बना है और बीच में एक बड़ा सा झूमर है |

mugal prayer hall
मस्जिद का मुख्य इबादत खाना

 

jaama masjid dilli
मस्जिद के अंदर

जामा मस्जिद दिल्ली के बारे में कुछ अन्य जानकारी

  1. जामा मस्जिद में हर किसी धर्म का व्यक्ति जा सकता है मगर 5 बार होने वाली इबादत के समय केवल मुस्लिम जा सकते है |
    2. मस्जिद में प्रवेश हेतु कोई शुल्क नहीं है |
    3. मस्जिद में बानी चार में से एक मीनार पर्यटकों के लिए खुली है जहाँ से 123 सीढ़ी चढ़ने के बाद आप पुरे शहर का शानदार नजारा देख सकते है( शुल्क 50 रुपए/ प्रति व्यक्ति ) |
    4.परिसर में जूता जमीन रखने की इजाजत नहीं है इसलिए उन्हें बाहर उतार सकते है या हाथ में लेकर केवल परिसर तक जा सकते है |
    मस्जिद में छोटे कपडे / कैप्री / शॉर्ट्स इत्यादि पहन कर प्रवेश वर्जित है इसलिए पुरे कपडे पहन कर जाने की कोशिश करे |

कैसे पहुंचे

जामा मस्जिद जाने का सबसे बढ़िया विकल्प है मेट्रो क्यूंकि दिल्ली शहर का ट्रैफिक पुरे देश में सबसे व्यस्त है , मस्जिद का निकटतम मेट्रो स्टेशन जामा मस्जिद  के नाम से ही है जो की दिल्ली मेट्रो की वाइलेट लाइन पर पड़ता है जिसे हेरिटेज लाइन के नाम से भी जाना जाता है | अगर येलो लाइन से यात्रा कर रहे है तो निकटतम स्टेशन चांदनी चौक है जो की यहां से लघबघ 2 किलोमीटर दूर है, वहां से बैटरी रिक्शा द्वारा 10 रुपए में मस्जिद तक आसानी से आ सकते है | दिल्ली परिवहन की बस भी निरंतर समय पर दिल्ली की हर एक जगह से मस्जिद तक आती है जिनमे थोड़ी भीड़ रहती है और सड़क मार्ग भी काफी व्यस्त रहता है जिस से आने में काफी समय व्यर्थ होगा| इनके अलावा ola और uber कैब सेवा भी दिल्ली में दुरुस्त है, आप अपने हिसाब से कोई भी विकल्प चुन कर मस्जिद में घूम सकते है |
निचे और आसानी के लिए मैप है

 

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

7 thoughts on “जामा मस्जिद दिल्ली: शाहजहां द्वारा निर्मित आखरी लाल इमारत

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