एतमादुद्दौला का मकबरा, itmad ud daula

Tomb of Itmad-ud-daula – Draft of the Taj mahal

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Itmad-ud-daula का मतलब है खजाने की रक्षा करने वाला और ये उपाधि  बादशाह जहाँगीर ने अपने ससुर यानी मिर्ज़ा घियास बेग को दी थी, जिनकी कब्र इस खुबसूरत मकबरे में है. मैंने आगरा आने के बाद जब लोगो से घूमने की जगह के बारे में पुछा तो पता चला की ये मकबरा पहली मुग़ल इमारत है जो संगमरमर से बनाई गई थी और ताजमहल का डिजाईन इसी मकबरे से लिया गया है. इस मकबरे को जहाँगीर की पत्नी नूरजहाँ ने बनवाया था मिर्ज़ा घियास उनके पिता थे बाद में नूरजहाँ की माँ को भी इसी मकबरे में दफनाया गया था.

Itmad-ud-daula  मकबरे में सदियों से आराम कर रहे मिर्ज़ा घियास साहब की कहानी काफी रोचक है और अन्य मुगलों से अलग भी , कहानी है एक कंगाल व्यापारी के मुग़ल मंत्री और मंत्री से मुग़ल खजाने का रक्षक बनने की जिसे बताने से पहले कुछ तस्वीरे साझा कर देता हु .

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front view of Itmad-ud-daula
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another gate of tomb ( closed )
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Portrait panorma ( entrance gate of Itmad-ud-daula )

Itmad-ud-daula की कहानी

Itmad-ud-daula के बारे में जैसा मैंने ऊपर बताया की इस मकबरे को मिर्ज़ा घियास बेग की याद में उनकी बेटी ने बनवाया था, मिर्ज़ा साहब की जिन्दगी की बात करे तो वो इरान के एक व्यापारी थे जो एक समय कंगाली के दौर में थे उनके पास इतना भी पैसा नहीं था के वो अपनी बेटी मेहरुनिशा ( नूरजहाँ ) का पेट भर सके . उसी दौर में हिन्दुस्तान में अकबर व्यापार और कला को बढ़ावा दे रहे थे मिर्ज़ा साहब को इस बात का पता चला तो वो परिवार के साथ आगरा की तरफ चल दिए उन्हें उम्मीद थी के बादशाह कुछ सहायता करेंगे. इरान से आगरा आते आते उनकी बची खुची पूँजी लूटेरे लूट ले गये.

भूख और दुःख से अधमरे मिर्ज़ा घियास लुट जाने के बाद कंधार में रुक गये , कुछ दिन वहां रुकने के बाद एक दिन मिर्ज़ा को मुग़ल कारवां आता दिखाई दिया और उनसे उन्होंने अपनी दुःख भरी कहानी साझा की. मुग़ल सेनापति मालिक मसूद तरस खाकर उन्हें अकबर के दरबार ले आये जहाँ अकबर ने उनको दरबार में नौकरी पर रख लिया . अकबर की मौत के बाद जब जहाँगीर गद्दी पर बैठा तब तक मिर्ज़ा घियास मुग़ल दरबार के मंत्री बन चुके थे . जहाँगीर ने उनकी बुद्धिमता और इमानदारी से खुश होकर उन्हें संपूर्ण मुग़ल खजाने का खजांची बना दिया और Itmad-ud-daula की उपाधि दी .

एक तरफ जहाँ मिर्ज़ा को ऊँचे पद से सम्मानित किया गया वही दूसरी तरफ मेहरुनिशा के पहले पति की मौत हो गई और वो विधवा हो गई. एक दिन जहाँगीर की नजर मेहरुनिशा पर पड़ी और उन्हें प्यार हो गया , मोहब्बत के मामले में अकबर की तरह जहाँगीर भी कम नहीं थे उन्होंने मिर्ज़ा घियास से मेहरुनिशा का हाथ मांग लिया और निकाह कर लिया. निकाह के बाद मेहरुनिशा को नूरजहाँ नाम जहाँगीर की तरफ से ही मिला था. समय खुशहाली से बीतता गया और नूरजहाँ सबसे ताकतवर मुग़ल रानी बन गई और वो बादशाह की गैर मौजूदगी में मुग़ल सल्तनत के फैसले लेने लगी.

1622 में मिर्ज़ा घियास का निधन हो गया और मल्लिका ऐ हिन्द नूरजहाँ ने अपने पिता के लिए इस खुबसूरत Itmad-ud-daula मकबरे का निर्माण करने का हुकुम दिया. मकबरे को बनाने में करीब 6 साल का समय लगा शुरू में यंहा केवल मिर्ज़ा की कब्र थी बाद में नूरजहाँ की माँ और उनके रिश्तेदारों को भी यंही दफनाया  गया.

Itmad-ud-daula की सैर

आगरा और उसके आस पास जितनी भी इमारत Itmad-ud-daula से पहले बनाई गई थी वो सब लाल पत्थर की बनी हुई थी लेकिन ये पहली ईमारत है जो पूरी तरह से संगमरमर से बनाई गई है. हालाँकि इसका मुख्य दरवाजा और जिस चबूतरे पर एतमादुद्दौला का मकबरा बना है उनमे लाल पत्थर का ही इस्तेमाल किया गया है . यंहा आपको जो निर्माण शैली नजर आएगी वो पारसी और हिन्दुस्तानी मिश्रित शैली है. 

 एतमादुद्दौला का मकबरा, itmad ud daula
Itmad-ud-daula मकबरे की जो मीनारे है वो पारसी शैली में निर्मित है और जो बीच में मुख्य गुम्बद है वो हिन्दू शैली में बना है

कहते है ताज को जब बनाया जा रहा था तब इसी मकबरे को देख कर ढांचा तैयार किया गया था फिर भी खूबसूरती में ये मकबरा ताज से कम है लेकिन इसमें जो चित्र कला और जाली का काम है वो ताज महल से कही ज्यादा बेहतर है.

Itmad-ud-daula की दीवार और छत्त पर खूबसूरती से जो चित्र बनाये गये है उनमे असली रंग का इस्तेमाल हुआ है जो फूल फल से उस समय तैयार किये गये थे. जहाँगीर ने कई जगह खुद चित्र बनाये है , मुग़ल बादशाह होने के अलावा इन चीजो का भी उन्हें शौख था.

inlay work agra
inlay work at itmad-ud-daula

लाल बलुआ पत्थर से बने मुख्य दरवाजे से जब मकबरे की तरफ बढ़ते है तो अन्य मुग़ल स्मारकों की तरह चार बाग़ और पानी का फव्वारा इसमें देखने को मिलते है जो की बताते है जन्नत की पहचान होती है . दरवाजे पे कई कीमती पत्थर जड़े गये है जो खासकर राजस्थान,इरान से मंगवाए गये थे.

अगर आसमान से मकबरे को देखेंगे तो ये चार छोटे बगीचों के बीच रखे एक आभूषण की पेटी ( jewel box ) जैसा नजर आता है. प्रवेश के बाद मकबरे के दायें और से अंदर जाते है जहाँ मिर्ज़ा घियास बेग और उनकी बेगम की कब्र है और उसके आसपास अन्य कमरों में उनके रिश्तेदारों की कब्र है.

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मिर्ज़ा साहब और उनकी बेगम की कब्र

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मकबरे की पीछे की और भी एक दरवाजा है जो की यमुना नदी की तरफ खुलता है जहाँ से ताजमहल साफ़ नजर आता है अगर मौसम साफ़ है तो. वो दरवाजा प्रवेश हेतु बंद है जब ये इमारत बने जा रही थी तब मुग़ल राजपरिवार उसी रास्ते से मकबरे में आता था .

Itmad-ud-daula कैसे जाएँ

ताजमहल से इस मकबरे की दूरी है 6 km और आगरा किले से 3 km, अम्बेडकर पुल जो की यमुना नदी के ऊपर बना है उसे पार करके यंहा तक आया जा सकता है . Itmad-ud-daula तक अगर आप खुद से आते है तो थोडा मुश्किल है भीड़ भाड़ के अलावा पार्किंग की सुविधा भी अच्छी नहीं है . सबसे बेहतर विकल्प है ऑटो रिक्शा, आगरा में ola उबेर की सुविधा है लेकिन इस इलाके में उनके लिए थोडा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है ये मेरा खुद का अनुभव है .

TICKET AND TIMINGS

भारतीय पर्यटक – 15 रुपए

विदेशी पर्यटक – 110 रुपए

समय – सूर्योदय से सूर्यास्त तक ( प्रतिदिन )

अंत में यही सलाह है ताज महल और किले के अलावा भी आगरा में कई अन्य धरोहर है जैसे की Itmad-ud-daula , अकबर का मकबरा आदि, इसलिए कुछ समय निकालकर इन्हें भी देखने जाएँ.

Itmad-ud-daula के बारे में और पढ़े – CLICK HERE

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “Tomb of Itmad-ud-daula – Draft of the Taj mahal

    Dipali Bhasin

    (August 15, 2018 - 9:41 am)

    I really enjoyed reading your post. I have lived in Agra for three years and am enamored by the beauty of the monuments. Aaj tak itne sundar hai aur behetreen hai. I never knew that the design of the Taj Mahal was taken from this tomb. An interesting and informative article.

    Dipali
    https://www.spoonsandsneakers.com/

    […] से जुड़े मेरे अन्य ब्लॉग – itmad ud daula , अकबर का […]

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