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हुमायूँ का मकबरा: सबसे खुबसूरत मुग़ल स्मारक

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लघभग 462 साल पहले बनाया गया हुमायूँ का मकबरा आज के समय में मुग़ल वास्तुकला का एक जीता जागता उदाहरण है, वो बात अलग है की जितना आलिशान और खुबसूरत ये मकबरा है उतना ही बदकिस्मत इसमें दफ़न हुमायूँ था| हुमायूँ का पूरा नाम था नसीरूदीन मुहम्मद हुमायूँ , 1508 में काबुल में जन्मे हुमायूँ  महज २३ साल की उम्र में ही हिंदुस्तान के तख़्त पर बैठ गया था | अपने पिता बाबर के जीते जी कम उम्र में ही हुमायूँ युद्ध क्षेत्रो में जाने लगा था मगर उस से भी बुरा वक्त उसके बादशाह बनने के बाद शुरू हुआ| 1540 में भारत में सुर वंश ने कदम रखे और हुमायूँ को दिल्ली से खदेड़ दिया, हुमायूँ भाग कर इरान के वीराने इलाको में छिप गया| इस दौरान हुमायूँ को अफीम की लत लगी और एक नशेडी की तरह वो अपनी बची खुची सेना के साथ दोबारा दिल्ली का तख़्त पाने के लिए प्रयास करता रहा |

खैर मेहनत रंग लाइ और 1556 में उसने सुर वंश से दिल्ली छीन ली, तख़्त पर बैठे 7 महीने ही हुए थे की अपने निजी पुस्तकालय की सीढियों से गिर कर हुमायूँ अल्लाह को प्यारे हो गये| मगर जिस समय उसकी मौत हुई उस समय तक उत्तरी भारत , ईरान और अफगानिस्तान के एक बड़े हिस्से पर मुग़ल वंश का कब्ज़ा हो चूका था | मौत के बाद भी हुमायूँ की कब्र को दर दर की ठोकरे खानी पड़ी अकबर हेमू के डर से अपने पिता की कब्र को खुदवाकर सिरहिन्द और कंधार में स्थान्तरित करता रहा , अंत में जब अकबर ने हेमू को हर दिया तो सन 1569 में बेगा बेगम ने ये खुबसूरत हुमायूँ का मकबरा  बनवाया | ये तो थी कहानी हुमायूँ की अब कुछ तस्वीरो के साथ हुमायूँ का मकबरा

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पश्चिमी द्वार से हुमायूँ का मकबरा

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हुमायूँ का मकबरा

हुमायूँ के बारे में बताने के लिए मेरे पास काफी सारी बाते है जो हुमायूँ का मकबरा घूमते समय वहां बने म्यूजियम से पता चली | एक लम्बे अरसे से हुमायूँ की ख्वाइश थी के वो एक ऐसा शानदार शहर बनवाए जिसकी ऊँची चारदीवारी और बुर्ज हो, उसमे एक सात मंजिला भव्य महल हो जिसके चारो तरफ बाग़ हो | और उस शहर का नाम हो दीन ऐ पनाह यानी ईमान का आसरा, और ये हुमायूँ का मकबरा ही उसके सपनो का शहर प्रतीत होता है जो यमुना नदी के किनारे उसकी पहली बेगम ने बनवाया था| मकबरे का नक्शा मिर्ज़ा घियास बेग ने तैयार किया था, मिर्ज़ा घियास बेग वही है जिनका मकबरा एतमाद उद दौला आगरा में स्तिथ है |

मकबरे की वास्तुकला की बात करे तो हिंदुस्तान में पहले से ही पत्थर का इस्तेमाल होता आया है , हुमायूँ का मकबरा भी मजबूत भूरे पत्थर से बना है जिसे बाद में लाल पत्थर और संगमरमर से ढका गया है| मकबरे के लिए राजस्थान और आगरा की खदानों से पत्थर यमुना नदी के रास्ते ही दिल्ली लाया गया था और हजारो मजदूरो की मेहनत के बाद 8 साल में ये स्मारक बनके तैयार हुआ था| मकबरे के चारो तरफ चार बाग़ है जो की मुस्लिम धर्म में जन्नत की निशानी माने जाते है |

मकबरे की पूर्वी दिशा में बहती यमुना नदी का पानी बाग़ की धाराओ में बहता और इन्हें सींचता था| इसके अतिरिक्त मकबरे के उतरी और पश्चिमी छोर पर स्तिथ कुएं , बाग़ में बीछे मिटटी के पाइपो के जल द्वारा विभिन्न जल स्त्रोत को पानी पहुंचाते थे | मकबरे के द्वार पे सितारों का अलंकरण बना हुआ है जो की मुग़ल वंश में अन्तरिक्ष के संकेत माने जाते थे |

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मकबरे के पास बना बाग़

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हुमायूँ के मकबरे की मेरी यात्रा

अगर मकबरा देखने के लिए सर्वोत्तम समय की बात की जाए तो वो है सूर्यास्त से कुछ देर पहले, मै जिस वक्त मकबरे में पहुंचा उस समय सूर्यास्त लगभग होने वाला था| भीड़ भी कम थी क्यूंकि पर्यटक ज्यादातर दिन में ही आते है , मकबरे को पास से देखने के बाद मैंने चारो तरफ पैदल भ्रमण करने की योजना बनाई क्यूंकि बताते है ये जो चारबाग मकबरे के इर्द गिर्द बने है वो हिंदुस्तान में पहली बार बनाये गये थे और अगर मकबरा देखने जाएँ और बाग़ घूमके न देखे तो यात्रा बेकार है | मै आपको सलाह देना चाहूँगा की मकबरे के चारो और बने बाग़ जरुर घुमे क्यूंकि यहाँ हुमायूँ के अलावा अन्य भी कई छोटे स्मारक है जो इस मकबरे की सुन्दरता के पीछे नजरअंदाज हो गये है |

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मकबरा हर कोने से एक समान दिखता है

अगर आप इतिहास के साथ तस्वीरबाजी के भी शौक़ीन है तो कम से कम 2 घंटे इस मकबरे में जरुर घुमे वैसे तो ये काम आधे घंटे में भी हो सकता है ये आप पे निर्भर करता है की आपने कैमरे में क्या कैद करना है|

अगर आप दिल्ली जाते है तो निजामुद्दीन इलाके में बना हुमायूँ का मकबरा जरुर देखने जाएँ, ये न केवल एक मकबरा है बल्कि मुग़ल वास्तुकला का सबसे सुंदर नमूना और सरंक्षित स्मारक है |

अन्य जानकारी

मकबरा देखने हेतु 30 रुपए का टिकट लगता है जिसे आप ऑनलाइन भी बुक कर सकते है यात्रा डॉट कोम की वेबसाइट पर जाकर, टिकट पर लम्बी लाइन लगती है जो की आपके मकबरा देखने के उत्साह को कम कर सकती है |

समय – सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक

मकबरा देखने जाने के लिए निकटतम मेट्रो स्टेशन जे.एल.एन स्टेडियम है और वहां से 10 रुपए देकर बैटरी रिक्शा से आसानी से जाया जा सकता है, दिल्ली में कैब और सिटी बस सेवा की व्यवस्था काफी अच्छी है मगर उसमे ट्रैफिक जाम में फसने की सम्भावना ज्यादा रहती है|

निकटतम रेलवे स्टेशन – हजरत निजामुद्दीन जंक्शन

नीचे हुमायूँ के मकबरे का मैप है जो की मकबरे तक पहुँचने में आपकी मदद करेगा

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Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

4 thoughts on “हुमायूँ का मकबरा: सबसे खुबसूरत मुग़ल स्मारक

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