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हिडिम्बा देवी मंदिर मनाली: Hadimba temple in winters

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कई इतिहासकारों के अनुसार ऐसा माना जाता है की मनाली का इतिहास हिडिम्बा देवी मंदिर से ही शुरू होता है, किसी जमाने में यहाँ राक्षसों का राज होता था स्वयं हिडिम्बा भी एक राक्षसी थी| लेकिन महाभारत के युग में महाबली भीम ने हिडिम्बा से शादी की जिसके बाद वो कालांतर में मानवी बनी और बाद में देवी बनी|

साल 1553 में कुल्लू के राजा बहादुर सिंह ने एक प्राचीन गुफा के किनारे हिडिम्बा देवी मंदिर का निर्माण करवाया था, मंदिर को गुफा के पास एक चट्टान के ऊपर बनाया गया है जिसे डूंग कहते है इसलिए स्थानीय लोग इस मंदिर को डूंगरी देवी का मंदिर भी कहते है| आज के समय में ये मंदिर मनाली आने वाले पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है क्यूंकि ये जगह जितनी धार्मिक है उतनी ही खूबसूरत भी है|

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हिडिम्बा देवी का मंदिर
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मंदिर के बाहर सिंह की प्रतिमा

हिडिम्बा देवी मंदिर का इतिहास

अगर आपने महाभारत पढ़ी है या टीवी पर देखी है तो आप जानते होंगे की पांडव जुए में सब कुछ हार कर वनवास पर चले गये थे जहाँ कौरवो ने उन्हें मारने के लिए लाक्षा गृह जैसी कई विफल कोशिश की थी| उसी लाक्षा ग्रह से बचकर पांडव गंगा के रास्ते होकर वर्तमान मनाली में पहुंचे जहाँ हिडिम्बा और हिडिम्ब नाम के दो राक्षशो का राज था| पांडव मनाली में एक जंगल में विश्राम कर रहे थे की हिडिम्बा वहाँ उनका शिकार करने आ गयी |

लेकिन वहाँ मौजूद महाबली भीम को देखते ही हिडिम्बा को उनसे प्यार हो गया और वो बिना मारे ही वापस अपनी गुफा में लौट आई, गुफा में मौजूद उसके भाई हिडिम्ब को हिडिम्बा  की इस हरकत पर गुस्सा आया और वो पांड्वो को मारने जंगल में चला गया| जिस समय हिडिम्ब ने सोते हुए पांड्वो पर हमला किया उस समय महाबली भीम सबके लिए पानी लेने गये हुए थे जिस समय वो वापस आये उस समय तक हिडिम्ब ने सबको मूर्छित कर दिया था|

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मंदिर के इर्द गिर्द देवदार के घने जंगल है

ये सब देख क्रोधित हुए भीम और हिडिम्ब के बीच कई देर तक युद्ध चला जिसमे अंत में हिडिम्ब की मौत हुयी, हिडिम्बा ने उसकी मौत के बाद भीम से शादी का प्रस्ताव रखा जिसे भीम ने नकार दिया| बाद में कुंती ने भीम को समझाया के अब इसका कोई नहीं बचा तो तुम इस से विवाह कर लो| भीम से शादी होने के बाद हिडिम्बा राक्षाशी से मानवी बन गयी, इस घटना के बाद पांडव अपने अगले पडाव की और चल पड़े मगर हिडिम्बा ने साथ जाने से इनकार कर दिया और वही एक चट्टान के नीचे बैठ तपस्या में लीन हो गयी|

हिडिम्बा और भीम के एक संतान हुई जिसका नाम घटोत्कच था, ये वही संतान थी जिसने कौरवो के साथ युद्ध में कर्ण के बाण से अर्जुन की रक्षा करते हुए खुद का बलिदान दे दिया था| इस बलिदान के बाद हिडिम्बा को सब देवी मानने लगे,वही तप करते हुए हिडिम्बा ने अपने प्राण त्याग दिए और वो कुल देवी कहलाई|

आज उसी जगह पर साल 1553 में कुल्लू के राजा बहादुर सिंह ने उनका मंदिर बनवाया| हर साल मई के महीने में हिडिम्बा के वंशज मिल कर वहां मेले का आयोजन करते है जो की डूंगरी मेला के नाम से मशहूर है |

Hadimba temple in winters ( मेरी यात्रा )

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मेरी एक बुरी आदत है मै किसी भी जगह जाता हु तो वहां अपने भ्रमण की शुरुवात शाम को करता हु सूर्यास्त से कुछ देर पहले लेकिन मनाली में जैसे ही मै घूमने के लिए होटल से बाहर आया वहां बर्फबारी शुरू हो चुकी थी| कैब ने मुझे मॉल रोड पर उतार दिया वह से कुछ 2 किलोमीटर दूर हिडिम्बा देवी मंदिर है जिसका आधा रास्ता हमें चढ़ाई करके तय करना पड़ता है|

जब तक मैंने चढाई शुरू की थी उस समय हल्का अँधेरा होने लगा था इसलिए मैंने कैमरा बंद रखा मगर कई जगह बेहद खुबसूरत नजारे दिखे जिनको मैंने कैमरा में कैद किया और आपके साथ साझा कर रहा हूँ|

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हलकी बर्फबारी के बाद हिडिम्बा मंदिर

पन्द्रह बीस मिनट की चढाई के बाद मै मंदिर के सामने पहुँच गया, ये मंदिर अन्य हिन्दू मंदिरों की तुलना में काफी अलग है | पूर्णतया लकड़ी से बने होने के कारण मंदिर पैगोडा जैसा दिखाई पड़ता है, मंदिर के भीतर छत्त पे जानवरों के सींग आदि की सजावट है | देवदार के पेड़ो से घिरा हिडिम्बा देवी का मंदिर  कठ नक्काशी का एक बेहतरीन उदाहरण है, ऐसी नक्काशी कुल्लू मनाली में कम ही दिखती है|

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कठ नक्काशी और मंदिर की दीवारों पर टंगे जानवरों के सर

मंदिर में एक घंटा बीताने के बाद मै वापस होटल लौट आया और उस रात जो बर्फ का तूफ़ान मैंने देखा शायद कोई सपने में भी उसे न देखे| मैंने अगली सुबह मनाली को बर्फ में ढका पाया जिसकी तस्वीरे अगले लेख में साझा करूंगा|

हिडिम्बा देवी मंदिर और मनाली की कुछ अन्य जानकारी

कैसे पहुंचे- हिडिम्बा देवी का मंदिर  मनाली में है और यहाँ तक पहुंचना काफी आसान है, मॉल रोड से मंदिर की दुरी 2 किलोमीटर है जिसे प्राक्रतिक नजारा देख पैदल भी आसानी से पूरी कर सकते है| मॉल रोड बिलकुल मनाली के बस अड्डे के पास शुरू होता है और यहाँ तक दिल्ली और चंडीगढ़ से निरंतर बस सेवा उपलब्ध है|

मनाली का नजदीकी एअरपोर्ट भुंतर में है जहाँ चंडीगढ़ और दिल्ली से कुछ विमान मिल सकते है, एअरपोर्ट से मंदिर तक आने के लिए बस के साथ साथ  कैब सेवा का भी विकल्प है जो 3 घंटे का समय लेती है भुंतर से मनाली तक| निचे हिडिम्बा मंदिर तक का मैप जो की आपके काम आएगा|

एंट्री फीस- मंदिर को देखने का कोई शुल्क नहीं लगता , मंदिर के आसपास कई रोमांचक गतिविधियों का आयोजन होता है जिनके शुल्क काफी महंगे है|

कहाँ रुके-मनाली में सर्दियों के मौसम में होटल काफी सस्ते रहते है मै अनुभव के आधार पर आपको oyo room एप्लीकेशन के द्वारा होटल चुनने की सलाह दूँगा क्यूंकि ये काफी सस्ते और अच्छे भी है| कुछ सस्ते होटल

  1. होटल हिम रीजेंसी 
  2. होटल वेलेरियन
  3. सत्यम पैराडाइस

शौपिंग- मनाली का मॉल रोड शौपिंग के लिए काफी मशहूर है यहाँ आप हस्तशिल्प के समान के अलावा कपड़ो और आभूषण की भी खरीददारी कर सकते है जो की अन्य पहाड़ी शहरो के मुकाबले काफी सस्ते है|

food- मनाली मासाहारी व्यंजन के शौक़ीन लोगो के लिए वरदान है यहाँ की ट्रोट फिश दुनियाभर में मशहूर है अगर आप मनाली जाते है तो इसका स्वाद जरुर चख के आये| माल रोड के इर्द गिर्द कई दुकाने है जहां इस ख़ास व्यंजन  का लुत्फ उठा सकते है|

मंदिर से जुडी कोई जानकारी अधूरी रह गयी हो तो कमेंट करके आप पूछ सकते है, लेख अच्छा लगे तो ईमेल द्वारा यात्रा चिट्ठे को सब्सक्राइब करे|

पिछला लेख- 1. अजमेर में उर्स के मौके पर

2. कुफरी में बर्फबारी

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

3 thoughts on “हिडिम्बा देवी मंदिर मनाली: Hadimba temple in winters

    Ankit yadav

    (March 22, 2019 - 7:44 pm)

    I am totally fascinated towards these beautiful pictures!!!!!

    Mridula

    (April 11, 2019 - 4:31 pm)

    I have been there but did not know the history, thanks for sharing!

      rao ankit

      (April 12, 2019 - 7:04 pm)

      Thanks Mridula for appreciating my work

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