Gujari Mahal Gwalior History in hindi

Gujari Mahal Gwalior : History in hindi

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एक पत्थर दिल से तराशा जाए,

थिरक उठे अंग परतिमा के बन्धु

पूजा अर्चन से पहले मधुकर उस,

फनकार शिल्पी को नवाजा जाए …

Gujari mahal Gwalior को भले ही सन 1922 के बाद केन्द्रीय पुरातत्व संग्राहलय के नाम से जाना जाता है लेकिन उसके इतिहास में एक अमर प्रेम कहानी है. एक अति सुंदर ग्वालन और एक राजा के प्यार की कहानी. ग्वालियर शहर में मेरा एक दिन का पडाव था इसलिए Gujari Mahal जाने की पहले से कोई योजना नहीं थी , केवल किला और तानसेन के मकबरे का भ्रमण करके मुझे आगरा के लिए निकलना था लेकिन शायद ये प्रेम कहानी सुनना मेरी किस्मत में लिखा था .

हुआ यूँ के मै गूगल मैप की गलती की वजह से किले के उरवाई गेट की बजाय Gujari Mahal Gwalior के सामने पहुँच गया, ग्वालियर के बारे में मैंने इन्टरनेट पर ज्यादा कुछ पढ़ा नहीं था क्यूंकि कुछ घंटे ही यहाँ रुकने की योजना थी . गुजरी नाम से कुछ संदेह हुआ के ये जरुर कोई एतिहासिक जगह है क्यूंकि यहाँ मराठो और राजपूतो का राज रहा है फिर गुज्जर जाती के नाम का महल. और उसके टिकेट घर पे मौजूद इंसान से इसका इतिहास मालुम पड़ा जो की ये है ..

Gujari Mahal Gwalior History in hindi

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Gujari Mahal Gwalior का प्रवेश द्वार

Gujari Mahal Gwalior के इतिहास की बात करे तो लघभग 15वी सदी के अंत की बात है उस समय ग्वालियर में राजा मान सिंह तोमर का राज था, भारत में दो मान सिंह मशहूर रहे है एक जयपुर के सवाई मानसिंह और एक ग्वालियर के राजा मान सिंह तोमर. राजा एक दिन ग्वालियर से 16 मील दूर राई नामक नदी के इलाको में शिकार खेलने गए, शिकार खेलने के बाद जब वो वहां विश्राम कर रहे थे तो उन्हें एक युवती दिखी जो की अति सुंदर और चतुर थी साथ में बलशाली भी थी क्यूंकि वो अकेली नदी में पानी पी रहे अपने पशुओ को जंगली जानवरों से बचा रही थी.

उसका नाम था मर्गनयनी और वो राई गाँव के गुज्जर समाज की लड़की थी जो की राजपूतो में नीची जात मानी जाती थी. मर्गनयनी  के खूबसूरती के राजा पहली नजर में ही मुरीद हो गये थे की उनका बल देख कर उन्होंने उसको ग्वालियर की पटरानी बनाने की ठान ली क्यूंकि उन्हें लगा के जब ये इतनी बलशाली है तो इसकी संतान भी बलशाली होगी. राजा ने ‘ मर्गनयनी ‘ से विवाह का प्रस्ताव रखा , अब ग्वालियर जैसी बड़ी रियासत का प्रस्ताव गूजरी ठुकरा न सकी उसने विवाह के बदले तीन शर्त राजा के सामने रखी. मर्गनयनी के रूप से मोहित हो चुके राजा ने तीनो शर्त मान ली.

पहली शर्त थी की वो केवल राई नदी का पानी पीयेगी क्यूंकि उसी पानी को पीकर ही आज वो इस काबिल हुई है की राजपूतो की रानी बन सके , दूसरी शर्त थी की उसका महल सबसे अलग जगह बनाया जाए और तीसरी ये थी की वो राजा के साथ हर युद्ध में लड़ने जायेगी. राजा मानसिंह तोमर ने तीनो शर्त मान ली और किले की तलहटी में एक खुबसूरत महल बनवा कर उसे ‘ Gujari mahal ‘ नाम दिया. राई नदी से पाइप के जरिये पानी को महल तक पहुँचाया. उनके इस विवाह से प्रजा में रोष था क्यूंकि वो एक नीची जात की ग्वालन थी .

राजा ने प्रजा और अन्य रानियों के रोष को झेला, समाज में इस बात से फैली तरह तरह की बातो का भी शांति से जवाब दिया और जब तक जीवित रहे इसी महल में गुजरी के साथ समय बिताया. मान सिंह ने दिल्ली के सुलतान लोधी को हराया था लेकिन उनकी मौत के कुछ साल बाद यंहा मुगलों का राज आ गया था.

Gujari Mahal Gwalior का केन्द्रीय पुरातत्व संग्राहलय में तब्दील होना

सन 1922 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ही इस Gujari mahal को संग्राहलय में तब्दील कर दिया गया यंहा की दीवारों पर कई आक्रतिया उकेरी गई और आसपास के क्षेत्रो में मौजूद पुरानी कलाकर्तियो और हथियारों को यंहा इक्कठा किया गया जिनमे कुछ कलाकर्ती पहली और दूसरी सदी की भी है जो की पत्थर की बनी है . महल के बाहर का कुछ हिस्सा खंडहर हो चूका है लेकिन अंदर लघभग कक्ष सही सलामत है .

गुजरी महल ग्वालियर
मोरैना से लाई गयी नायिका की कलाकृति
ग्वालियर, दर्शनीय स्थल
इस तस्वीर में एक मूर्ति सरस्वती जी की है और दूसरी मूर्ति नायिका की है

Gujari Mahal Gwalior के 28 प्रांगणों में ऐसी कई कलाकृतिया मौजूद है साथ में कुछ अन्य हस्तशिल्प कला और 19वी सदी की इस महल की तस्वीरे भी मौजूद है . अंदर के हिस्से में वो कमरे भी है जहाँ उस जामने में रानिया मशहूर संगीतकारों से संगीत सीखती थी. महल में कुछ सबूत तानसेन से भी जुड़े मिलते है , तानसेन का मकबरा भी इसी शहर में है 

archeological museum gwalior
वो कक्ष जहाँ 1922 सन की तस्वीरे और हथियार रखे है जो की पहली सदी से लेकर 16वी सदी तक के है

things to do in gwalior

 

Gujari Mahal Gwalior से जुडी कुछ अन्य जानकारी

Gujari Mahal Gwalior तक पहुचने के लिए लोहा मंडी के रास्ते जाना होगा जो उरवाई गेट से 3 किलोमीटर दूर है . ये म्यूजियम सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है. महल एक भीड़भाड़ भरे इलाके में है इसलिए कोशिश करे की सुबह जल्दी ही जाया जाए लघभग खुलने के समय.

टिकट की दर है भारतीय दर्शको के लिए 10 रुपए और अगर कैमरा साथ है तो 50 रुपए उसकी टिकेट, विडियोग्राफी के लिए 200 रुपए. विदेशी सैलानी के लिए टिकेट की कीमत 100 रुपए है. 

अगर पुरातत्व कलाकृतियो और हथियारों को देखने के इच्छुक है तो Gujari Mahal Gwalior आपके लिए सही जगह है किले से पहले ही यंहा जाने की कोशिश करे इसके अलावा महल में कोई अन्य चीज मौजूद नहीं जो मर्गनयनी से जुडी हो केवल एक प्रेम कहानी है जिसकी गवाह यंहा की दीवारे है. 

मेरे पिछले ब्लॉग यंहा से पढ़े ( इस पर क्लिक करे )

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

4 thoughts on “Gujari Mahal Gwalior : History in hindi

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