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चुन्नीलाल तंवर – बीकानेर के मशहूर शरबत वाले

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सच बताऊ तो शरबत कभी मेरा पसंदीदा पेय नहीं रहा. मुझे याद है बचपन से अब तक जो शरबत मैंने पिया था या लोगो को पीते देखा था उसका नाम है Roohafza, एक यूनानी कम्पनी हमदर्द का गुलाब फ्लेवर का शरबत. मेरा बचपन हरियाणा में बीता है, वहां शरबत का इतना चलन नहीं है न ही बाजार में इतना बिकता है. लेकिन जब हम स्कूल की छुट्टियों में अपने ननिहाल जाते थे बीकानेर में तब वहां घर पर Roohafza रोज बनता था. बीकानेर में आज भी शरबत उतना ही लोकप्रिय है जितना उस जमाने में था, वो बात अलग है की मैंने कभी शरबत के बारे में ज्यादा जानने में रूचि नहीं ली.

लेकिन इस बार जब बीकानेर जाने की योजना बनी तो इन्टरनेट पर बीकानेर के बारे में मैंने अच्छे से खोज की एक नाम सामने आया चुन्नी लाल तंवर शरबत वाले. 1939 में चुन्नीलाल तंवर जी ने पुरानी जेल रोड पर शरबत बनाना और बेचना शुरू किया था और आज 8 दशक बाद उनकी इस परंपरा को उनके पुत्र विधान तंवर आगे बढ़ा रहे है. समय के साथ बेचने के तरीके में थोडा बदलाव आया है लेकिन स्वाद वैसा का वैसा एक दम प्राक्रतिक बिना किसी मिलावट के.

16 अगस्त के दिन मै अपने परिवार के 5 अन्य सदस्यों के साथ जूनागढ़ किले में घूम रहा था, अगस्त के महीने में भी बीकानेर काफी गरम रहता है और दोपहर में घूमने के बाद जब गर्मी से सबका बुरा हाल हुआ तो सब लोग बीकानेर की मशहूर केसर कुल्फी खाने की योजना बनाने लगे. लेकिन मेरे दिमाग में चुन्नीलाल तंवर का शरबत घूम रहा था, मेरे समूह में मेरी तरह कोई भी शरबत के शौक़ीन नहीं था फिर भी जैसे तैसे मैंने सबको शरबत पीने के लिए तैयार कर लिया और जूनागढ़ से बाहर निकलते ही हम गूगल मैप के जरिये हम चल पड़े पुरानी जेल रोड इलाके की तरफ .

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पुरानी जेल रोड पर चुन्नीलाल तंवर शरबत वाले की दुकान

चुन्नीलाल तंवर शरबत वाले

किले से निकलने के ठीक 10 मिनट बाद हम पहुँच गये बीकानेर के एक व्यस्त इलाके में यानी के जेल रोड पर जहाँ बीकानेर की एक मात्र शरबत की दूकान है ‘ चुन्नीलाल तंवर शरबत वाले ‘ . काउंटर पर खड़ा लड़का एक कुल्हड़ में दूध और बर्फ के साथ अलग अलग फ्लेवर के शरबत को मिला कर एक के बाद एक ग्लास ग्राहकों को दिए जा था ,अब वो लोग वाकिफ थे इनके स्वाद से वो काउंटर पर आकर फ्लेवर बताते और कुछ सेकंड में उनको शरबत तैयार मिलता . लेकिन हम असमंजस में की कौनसा फ्लेवर पियें , दरअसल दूकान पर गुलाब,केसर, बेला और केवड़ा समेत दर्जन भर अन्य फ्लेवर है और इनमे से पसंदीदा फ्लेवर आप पी सकते है .

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अब वो कहावत तो सुनी होगी बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद, वैसे हम हरयाणवी क्या जाने शरबत का स्वाद ! वहां काउंटर पर खड़े हम कई देर तक सिर्फ मेनू देखते रहे . इसी दौरान काउंटर पर खड़े एक शख्स ने मुझसे पुछा क्या चहिये ? वो शक्श थे चुन्नीलाल तंवर के पुत्र विधान तंवर जो अब इस दूकान को सम्भालते है . मैंने बिना हिचकिचाए साफ़ बता दिया के जो सबसे अच्छा फ्लेवर है वो हमें पिला दो , उनकी नजर में सब अच्छे थे इसलिए विधान जी ने इस समस्या का हल निकाला और हमे सारे फ्लेवर चखने के दिए. ये बात इस बीकानेर शहर की सबसे अच्छी लगती है यंहा के लोग जिन्दा दिल है बेहद नरम मिजाज के वरना इतना मशहूर होने के बाद अन्य किसी शहर में कोई आपको सारे फ्लेवर चखने को नहीं देगा.

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खस् और केसर शरबत

खैर सब चखने के बाद हमने एक खस शरबत और 5 केसर शरबत के ग्लास आर्डर किये, खस का शरबत यंहा खस के पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है उसमे हलकी हलकी मिटटी की खुशबू भी आती है जिस के चलते मुझे वो सबसे पसंद आया . कुल्हड़ में मिटटी की खुशबू साथ शरबत पिने के बाद वो गर्मी थकान तुरंत काफूर हो गई जो जूनागढ़ किले में हमें महसूस हो रही थी. इसी दौरान मैंने कई देर विधान जी बात की और चुन्नीलाल तंवर के शरबत के बारे में जानकारी ली की आखिर क्यूँ इनके मुकाबले बीकानेर में कोई अन्य शरबत नहीं है .

क्यूँ ख़ास है चुन्नीलाल तंवर का शरबत

विधान तंवर

इस स्वाद का राज है की चुन्नीलाल तंवर के समय से अब तक शरबत प्राक्रतिक तरीके से तैयार किया जाता है बिना किसी मिलावट के फूल, जड़ और मसालों से. शरबत बनाने के लिए जिस भी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है वो देश के अलग अलग राज्यों से मंगवाई जाती है. जैसे बेला कन्नौज से और सौंफ गुजरात से, केवल दो फ्लेवर है जिनमे मिलावट होती है वो भी सिर्फ रंग बाकी कुछ नहीं. असल में भारत में Roohafza की वजह से लोगो को लगता है की गुलाब का शरबत लाल रंग का होता है इसलिए यंहा भी गुलाब के शरबत में लाल रंग और खस्स के शरबत में हरा रंग मिलाया जाता है इनके अलवा बाकी सब फ्लेवर एक दम शुद्ध रस और चासनी में तैयार होते है.

दूकान की अन्य जानकारी

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चुन्नीलाल तंवर शरबत वाले मशहूर फ्लेवर

adress- चुन्नी लाल तंवर शरबत वाले, पुरानी जेल रोड, बीकानेर ( राज )

बीकानेर जंक्शन से दुरी – 800 मीटर

समय – सुबह 10 से रात्री 11 बजे तक

शरबत की कीमत – 20 रुपए से 50 रुपए प्रति ग्लास है

:- अगर कोई जानकारी अधूरी हो या कम हो तो कमेंट करके बताएं जल्द से जल्द जवाब देने की कोशिश करूंगा. अंत में यही कहूँगा के अगर बीकानेर आपकी कभी यात्रा होती है तो चुन्नीलाल तंवर शरबत वाले की दूकान पर जाकर शरबत जरुर पीना, ये roohafja और रसना जैसे मिलावटी ब्रांड से कहीं ज्यादा बेहतर है. पहले जब मेरे सामने बीकानेर का जिक्र आता था तो भुजिया पापड और रसगुल्लों का स्वाद मेरी आँखों के सामने जुबान पर आ जाता था लेकिन अब चुन्नीलाल तंवर का शरबत भी इस सूचि में शामिल हो गया है.

बीकानेर से मैंने काफी कुछ सीखा मै इस से पहले कई जगह घूम चूका मगर कभी वहां के प्रशिद्ध व्यंजन या अन्य किसी चीज से रूबरू नहीं हुआ लेकिन अब मै एक नये शहर में घूमने के साथ साथ वहां के मशहूर street food के बारे में भी लिखूंगा, अभी फिलहाल मै लखनऊ में हु और यंहा के प्रशिद्ध TUNDEY कबाब और इदरिस की बिरयानी से आपको रूबरू करवाऊंगा.

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

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