chokhi dhani jaipur

एक शाम CHOKHI DHANI JAIPUR के नाम : PHOTO STORY

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किसी भी यात्रा को हम तक ही आकर खत्म होना चहिये , पर सब जगह एक जैसी नहीं होती कुछ आपको अपने पास बुला लेती है . मै जयपुर में था आमेर , जयगढ़, हवा महल, अल्बर्ट हॉल म्यूजियम देखने के बाद भी लग रहा था की कुछ छूट रहा है . वो मिला जयपुर टोंक रोड पे . एक रिसोर्ट जिसका नाम है CHOKHI DHANI . जयपुर से यही कोई पन्द्रह-बीस किलोमीटर दूर .

CHOKHI DHANI JAIPUR एक राजस्थानी शहरी गाँव

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चौखी ढाणी रिसेप्शन

चोखी ढाणी का मतलब होता है ‘ अच्छा गाँव ‘ . शहर के बीच में 1989 में बनाया गया एक गाँव का मॉडल जो की दस एकड़ में फैला है . यहाँ आपको मिलेंगे राजस्थान के अलग अलग इलाको के लोक नृत्य , जिसमे की कालबेलिया नाच की मकबूलियत सबसे अधिक है इसके अलावा कठपुतली का खेल , कंचे का खेल , इला अरुण के गीतों पे थिरकते युवक युवतिया . कही किसी जगह बैठा जादूगर आपको अपने हाथ की सफाई से मोहित करता है तो ठीक उसके सामने बैठा ज्योतिष पत्ते से आपका भाग्य पढता है . ऊंट की सवारी , हाथी की सवारी , नाव की सैर . गाँव के मेलो जैसे खेल जैसा की हम बचपन में देहाती मेलो में खेलते आये है . कुल मिला कर उन गुजरे हुए लम्हों को यंहा एक ही जगह पर फिर से संजो दिया गया है .

चोखी ढाणी की सैर

chokhi dhani price
मारवाड़ी वेशभूषा में बैठे मुनीम जी

मुख्य द्वार के पास मारवाड़ी पगड़ी में बैठे मुनीम जी से टिकट लेने के बाद जैसे ही अंदर परवेश करते है राम राम सा की आवाज कानो में पड़ती है और राजस्थानी ठाठ बाठ के और अपनेपण के साथ तिलक लगाकर इस्तकबाल किया जाता है उसके बाद आप मन मर्जी से अन्दर कही भी घूम सकते है तस्वीरे ले सकते है बिलकुल आज़ाद . कदम कदम पर तरह तरह के मंडप मिलते है जहाँ कलाकार राजस्थानी नाच और संगीत में झूमते हुए आपको अपनी तरफ आमंत्रित करते है

chokhi dhani stall
मेहँदी बनवाने की ठोड ( जगह )

फिर कुछ खाने पिने की चीजो के स्टाल जिनमे से कुछ की कीमत आपकी टिकेट में ही सम्मलित होती है कुछ के आप को चुकाने पड़ते है . हर एक खाने की मंडप या स्टाल पर राजस्थानी भाषा में ही उसके बारे में लिखा रहता है जैसे मेहँदी बनवान री ठोड , कंचे खेलन री ठोड, पानी पतासी एक रिपिया री एक , जल्जीरो फ्री रो मतलब कदम कदम पर आपको आभास करवाया जाता है की आप एक ठेठ राजस्थानी गाँव में है और वाकई में वंहा घूमते हुए इंसान सब मोह माया से बहार आकर चोखी ढाणी के रंग में ही रंग जाता है .

puppet show chokhi dhani
कठपुतली का खेल

इन सब के बाद chokhi dhani में आता है कठपुतली का नाच , आग के करतब , नट का खेल, जादू का खेल और एक ज्योतिष महाशय जो की आपके हाथ की रेखाओ को पढ़ते है और उनका तोता आपके नाम का कार्ड उठाता है और आपका भविष्य उस कार्ड से ज्योतिष महाशय बताते है .

MAHARANA HALDIGHAATI
हल्दीघाटी की प्रतिकृति, महाराणा प्रताप और मान सिंह

इसके बाद राजस्थानी इतिहास से आपको रूबरू कराने के लिए हल्दीघाटी युद्ध का एक ढांचा जिसमे की हाथी घोड़ो और खनकती तलवारों की धवनी के साथ बताया जाता है उस दौर के सबसे बड़े युद्ध के बारे में . इसी के पास में वैस्नो देवी मंदिर की प्रतिकृति , पनघट , भारत के अलग अलग राज्यों की प्रतिकृति जहाँ उनके रहन सहन को chokhi dhani में आचे से दिखाया गया है कश्मीरी शिक्कारा नाव से लेकर गोवा के घरो तक आपको रूबरू कराया जाता है .

BOATING CHOKHI DHANI
नाव की सैर

इसके आगे आता है फन जोन जिसमे की गाँव की सैर , नाव की सैर , झरने की सैर , मालिश , निशानेबाजी के खेल शामिल है . एक इंसानों द्वारा बने गई नदी जो असल नदी जैसी है छोट्टी है उसके मुकाबले पर वो गीत याद दिला देती है ‘ ये राते ये मौसम नदी का किनारा ‘

VILLAGE RIVER
ये मौसम ये बारिश नदी का किनारा

मनोरंजन यंही खत्म नहीं हो जाता , बच्चो को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली ऊँट की सवारी और हाथी की सवारी , बैलगाडी की सवारी आदि सब एक ही जगह मिलती है जिनको जीवन भर में कभी नि भूला जा सकता .

RAJASTHANI MARKET
बाजार

अंदर एक बाजार भी है जिसमे राजस्थान के अलग अलग जगह के परिधान , आभूषण कई तरह की कलाकृतिया उचित मूल्य पर मिलते है पर जेसा की हमारे देश के लोग मोल भाव के बिना कुचलते नहीं यंहा वो सब नहीं चलता क्युकी ये कर्मचारी है बस इनको जो अंकित मूल्य मिलता है वो बेचना इनकी मज़बूरी है तो कोई फायदा नहीं मोल भाव करके निराश होने का , ये वही जगह है जहा महिलाओ का अधिकतर समय बीतता है और वाजिब भी है अब इन्ही सब कला और परम्परा के लिए राजस्थान को जाना जाता है .

RAJASTHANI THAALI

घुमने फिरने के बाद असली मजा यानी के खाना खाने की बारी , पर्ची दिखा के एक झोपड़ीनुमा हाल में राम राम सा की आवाज के साथ गरमजोशी से आपका स्वागत होता है . हाल में पारम्परिक ढंग से जमीन पर बैठकर खाना खाने की व्यवस्था मिलेगी जंहा पत्ते की थाली ( पत्तल ) में सांगरी के साथ शुरुवात की जाती है और फिर एक से बढ़ के एक राजस्थानी पकवान दाल बाटी चूरमा , गट्टे का साग , कढ़ी, सब्जी दो तीन तरह के अनाज की पूरिया जलेबी नमकीन लस्सी परोसी जाती है . खाना खिलाने वाला स्टाफ जोश से भरा है आपको बार बार टोक देंगे होकम थे तो काईं कोनी खा रया ( हाडोती भाषा ). एक साथ सौ के लघभग पर्यटक chokhi dhani में एक छत्त के निचे बैठ के खाना खाते है, फिर भला एसा मौका हो तो औसत दर्जे का खाना खाने पर पछतावा भी नहीं होता एक तरह का अनुभव मिलता है यूँ मिल बैठ के गाँव का खाना खाने का .

चोखी ढाणी जयपुर

खाना खाने के बाद कुछ देर बाहर लगी खाट ,चारपाई पे विश्राम करके भी बीता सकते है जहां खुले आसमान के निचे उन पर लेट ते ही एक पल में बचपन की यादे जिन्दा हो जाती है गाँव की भूली बिसरी यादे भाई-बहन जो की अब समय के साथ दूर बहुत दूर हो चुके है , गली मोहल्लो की बाते अक्सर इसी तरह हम बचपन में खाट पे बैठ के करते थे , कितना सुन्दर है ये सब एक दम सपनो जैसा यंहा कला है बेमिसाल संगीत है चटपटा खाना है . हालाँकि ये गाँव वास्तविक गाँव से काफी अलग है यंहा भूखमरी , गरीबी , बाढ़ , सुखा आतमहत्या करते किसान नहीं है फिर भी एक गाँव का एहसास कराती चका चौंध भरी दुनिया है जिसकी संकल्पना बिकती है .

11 बजे ढाणी बंद हो जाती है और समय आ जाता है एक शहरी गाँव को अलविदा कहने का .

इस से अगले ब्लॉग में चोखी ढाणी की टिकेट और अन्य जानकारी दूंगा मिलते है अगले ब्लॉग में .. राम राम सा

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “एक शाम CHOKHI DHANI JAIPUR के नाम : PHOTO STORY

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