हाथी गाँव जयपुर

तो केवल तस्वीरो मे ही रह जाएगा ‘Hathi gaon jaipur’

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इस बार छुट्टियों पर जाने से पहले ठान लिया था के जयपुर की बची खुची जगहों पर घूमना है चाहे कुछ हो जाए , अब जब घर से वापस जाने का टाइम हुआ तो एक दिन सिद्धार्थ जोशी का Hathi gaon jaipur का ब्लॉग याद आ गया . ये मेरे लिए एक नई जगह थी कई बार जयपुर भ्रमण करने के बाद भी कभी नहीं सुना था इस गाँव के बारे में खैर इस बार प्लान पूरा था सीधा हाथी गाँव पहुँच गया एक शांत जगह एक मॉडर्न गाँव जिस पर सरकार ने एक मोटी रकम खर्च की है ताकि जयपुर में रहने वाले हाथियों की जरुरतो को पूरा किया जा सके.

असल में Hathi gaon jaipur क्या है

hathi gaon jaipur
हाथी गाँव जयपुर

साल 2006 में सरकार ने करोड़ो रुपए खर्च करके जयपुर और आसपास काम करने वाले हाथियों और उनके महावतो के लिए एक गाँव बनाना शुरू किया ताकि उनकी जरुरतो को पूरा किया जा सके , हाथियों की चिकित्सा से लेके महावतो को रहने के लिए घर दिए जा सके . 4 साल में बनकर तैयार हुए Hathi gaon jaipur में अब लघबग 100 हाथी है जिन्हें केरल , असम से लाया गया है . यंहा इन हाथियों के लिए तीन तालाब और कई शेड बनाये गये है . दिन भर आमेर में काम करने के बाद हाथी शाम को यंहा वापस लौट आते है.

मेरी Hathi gaon jaipur की यात्रा

elephants in hathi gaon jaipur
गाँव के अंदर हाथियों के लिए बने शेड

दिल्ली जयपुर रोड से 2 km दूर बसे Hathi gaon jaipur में एंट्री के लिए टिकेट सिस्टम है 55 रुपए टिकेट भारतीय पर्यटकों के लिए और विदेशियों के लिए 300 रुपए ,इस गाँव में प्रवेश करते ही पहले शक्श ने हाथी की सवारी का ऑफर दिया लुभावनी बाते जिनसे साफ़ प्रतीत होता है आपको मूर्ख बनाया जा रहा है .

हाथी गाँव का नक्शा आर्किटेक्ट राहुल मेहरोत्रा और रोबर्ट स्टीफेंस ने बनाया है हाथियों को रखने की और जगहों से कही ज्यादा बेहतर लेकिन इन विशालकाय जानवरों को दिन भर आमेर किले में काम करने के बाद यंहा भी आराम नहीं करने दिया जाता , यंहा भी पर्यटकों को शाम के समय हाथी की सवारी करवाई जाती है . मैंने एक शेड में जाकर हाथी की तस्वीर लेनी चाही लेकिन शायद यंहा बिना पैसे के वो भी नहीं कर सकते फिर भी कुछ एक तस्वीरे ले ली थी.

विदेशी सैलानियों के बीच ये हाथी गाँव जयपुर  कुछ ज्यादा की लोकप्रिय होता जा रहा है जो लोग आमेर किले में हाथी की सवारी नहीं कर पाते वो शाम के समय हाथी गाँव आकर सवारी करते है , हाथियों को चारा खिलते है और उन पर पेंटिंग्स बनाते है.

यंहा रहने वालो महावतो से मैंने बात की तो पता चला यंहा पर करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी सुविधाओ का अभाव है तालाबो में पानी की कमी है हाथियों के माहिर चिकित्सक नहीं है. टिकेट से आने वाले पैसे को केवल गाँव की साज सज्जा पर खर्च कर दिया जाता है.

Hathi gaon jaipur, हाथी गाँव जयपुर
हाथी गाँव जयपुर

मै हाथी गाँव  के तालाब पर हाथियों को नहाते हुए देख रहा था तभी एक दस साल का लड़का आकर चाकलेट मांगने लगा और बदले में हाथी के शेड में ले जाने का वादा किया दस रुपए उसको देने के बाद वो शेड में ले गया उस शेड में एक हाथी को जंजीरों से जकड रखा था एक विशालकाय जानवर एक छोटी जंजीर को चाहे तो तोड़ भी सकता है लेकिन एक तकनीक है महावतो की.

वो यह है की जब हाथी छोटा होता है अपने बचपन में होता है तभी इन्हें जंजीरों से बाँधा जाता है वो तोड़ने की कोशिश भी करते है पर तोड़ नहीं पाते. उनको भ्रम हो जाता है की ये कभी नहीं टूटेगी ऐसे ही ये भ्रम उनका जीवन भर रहता है और बड़ा आकार होने के बावजूद वो जंजीर तोड़ने की कोशिश नहीं करते. ये मजेदार तकनीक बताई वंहा मौजूद उस हाथी के महावत ने.

Slum poor kids india, जयपुर हाथी गाँव
अंकल चोकलेट दे दो

बात करते करते सामने एक पहाड़ी दिखी जो की हाथियों के थान से कुछ कदम दुरीं पे थी, थान उस मैदान को बोलते है जहां हाथियों को खुला छोड़ दिया जाता है एक लम्बा चौड़ा मैदान जिसके किनारों पर सुरक्षा हेतु बाड या लोहे की रेलिंग लगी होती है .

तो केवल तस्वीरो में रह जाएगा Hathi gaon jaipur

Hathi-gaon-jaipur

हाथी गाँव में सरकार केवल टूरिज्म के लिहाज से काम कर रही है , हाथी पालको की कई सारी मांग है छोटे तालाब जिनकी नियमित समय पर सफाई हो , महावतो के बच्चो के लिए स्कूल और डिस्पेंसरी हो. यंहा बाहर से हाथी खरीद कर लाने की अनुमति नहीं है जिन पैसो को टिकेट के जरिये हम लोगो से लिया जा रहा है उसे गाँव की साज सज्जा पर खर्च किया जा रहा है उन्हें अगर हाथियों के सरंक्षण पर खर्च किया जाए तो और भी बेहतर होगा वरना ये हाथी गाँव आने वाले समय में एक दिन केवल तस्वीरो में रह जाएगा

Hathi gaon jaipur कैसे पहुंचे

अगर आप भी इन थके हारे जानवरों की सवारी करना चाहते है या इनका रहन सहन देखना चाहते है तो जयपुर भ्रमण के दौरान Hathi gaon jaipur जरुर जाए ये जगह दिल्ली जयपुर हाईवे पर आमेर रोड चौराहे से 2 km की दूरी पर नारदपुरा रोड पर है गूगल मैप द्वारा इस गांव तक आसानी से पहुंचा जा सकता है . हाथी सवारी की किराया आपकी जेब पर निर्भर करता है दो हजार से पांच हजार शायद जैसा सुना था वहां मैंने सवारी नहीं की थी.

Hathi gaon jaipur के अलावा मेरे जयपुर पर लिखे अन्य ब्लोग्स –

hawa mahal jaipur – photo story

chokhi dhani jaipur

aamer fort

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

1 thought on “तो केवल तस्वीरो मे ही रह जाएगा ‘Hathi gaon jaipur’

    […] हाथी गाँव और नाहरगढ़ घूमने के बाद यंहा तक पहुँचने में मैंने देर कर दी, उस समय तक महल के बाहर चहल पहल काफी बढ़ गई थी क्यूंकि महल के सामने सडक के दोनों तरफ दुकाने है जो की हाश्तशिल्प का सामान , चमड़े का सामान बेचते है .तस्वीरे ठीक से नहीं ले पाया अगली बार कोशिश करूंगा फिर कभी जयपुर भ्रमण हुआ तो अच्छे से तस्वीरे ले पाऊ और इस चिट्ठे में अपडेट करू . […]

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