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अकबर का मकबरा – EXPLORING TOMB OF AKBAR THE GREAT

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Tomb of Akbar the great यानि अकबर का मकबरा वो जगह है जहाँ  मुग़ल साम्राज्य के अजीम ताकतवर शहंशाह जलालुदीन मोहम्मद अकबर की कब्र है . आगरा से 4 km दूर सिकंदरा में बने अकबर के मकबरे का निर्माण कार्य 409 साल पहले 1605 में स्वयं अकबर  ने अपने जीते जी शुरू करवा दिया था, लेकिन मकबरा  बनने से पहले ही अकबर की म्रत्यु हो गई और बाद में जहाँगीर ने इसका निर्माण पूरा करवाया. इस इमारत को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है की अकबर सभी धर्मो को मानता था इसके दरवाजो पर हिन्दू, मुस्लिम, जैन शैली नजर आती है.

मुगलों की राजधानी रहे इस आगरा शहर में मेरी यात्रा का पहला दिन है मुझे इन मुगलिया इमारतो को देखने का शौख है इस से पहले दिल्ली का लाल किला और कई अन्य शहरो में मौजूद मुग़ल धरोहर मैनी देखी है. ये आगरा में मेरा दूसरा दौरा है पहला दौरा स्कूल टूर था उस समय इतनी आजादी नहीं थी की जहाँ मन किया घूम लिए इसलिए केवल ताज महल देख कर वापस जाना पड़ा था. ताजगंज में होटल से सिकंदरा तक मैंने ola cab लेके सबसे पहले अकबर का मकबरा  देखने की योजना बनाई.

सिकंदरा  की बात की जाए तो ये वो जगह है जहाँ दिल्ली के सुलतान सिकंदर लोधी की सेना ने आगरा को अपने अधीन करने से पहले पडाव डाला था उनके नाम पर ही इस जगह का नाम सिकंदरा पड़ा.

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ये मकबरे का दक्षिणी द्वार है इस दरवाजे को बुलंद दरवाजा कहते है. इसमें नजर आ रहे लाल हिस्से को अकबर ने बनवाया था और जो संगमरमर की मीनारे है उनका निर्माण जहाँगीर ने करवाया था.
अकबर का मकबरा, TOMB OF AKBAR
दरवाजे पर अल्लाह के 99 नाम लिखे है साथ में हिन्दू धर्म का चिह्न स्वास्तिक भी नजर आता है जो की अकबर के धर्म निरपेक्ष होने का उदाहरण है .

अकबर का मकबरा 105 स्क्वायर मीटर के दायरे में बना हुआ है और इसमें प्रवेश के 4 द्वार है जिनमे से 3 बंद है और दक्षिणी द्वार यानी के बुलंद दरवाजा ही खुला है. ये द्वार अपनी खुबसूरत मीनारों के वजह से इस मकबरे का मुख्य आकर्षण है. दरवाजे पर चित्रकला के बीच हिन्दू और जैन धर्म के भी कई चिह्न मिलते है. इस द्वार के बाद आता है अकबर का मुख्य मकबरा यंहा चैकिंग के बाद आगे जाने दिया जाता है.

अन्य मुग़ल मकबरों की तरह इसमें भी चार दिशाओ को जाते रस्ते उनके बीच बहता पानी और बाग़ बगीचे है , अंदर बनी पांच मंजिला मुख्य ईमारत इस दरवाजे के मुकाबले बेहद साधारण है. इसकी 4 मंजिल अकबर ने खुद बनवाई जबकि पांचवी मंजिल जहाँगीर ने बनवाई थी , इस ईमारत में कोई गुम्बद नहीं है शायद सादगी पसंद करने वाले अकबर इस इमारत को जान भुझ कर साधारण बनवाना चाहते थे.

अकबर ने अपने पूर्वजो के विपरीत कई हिन्दू राजकुमारियो से निकाह किया, और निकाह के बाद कभी उन्हें मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया वो एक एसा शाशक था जो सभी धर्म को मानता था उनकी इज्जत करता था इस बात का सबूत है उनके दरबार में ख़ास पद पर रहे राजा मान सिंह और तानसेन.

TOMB OF AKBAR THE GREAT
इसी इमारत के तहखाने में अकबर की कब्र है जहाँ एक सुरंगनुमा रस्ते से जाया जाता है इसमें भी जो सफ़ेद हिस्सा नजर आ रहा है वो जहाँगीर ने बनवाया था.
अकबर की कब्र, AKBAR GRAVE
अकबर जितना महान था उतनी ही साधारण उसकी कब्र है न कोई नक्काशी न ही सजावट, केवल मार्बल के टुकड़े से ढकी है.

मुख्य ईमारत के तहखाने में अकबर की कब्र  तक एक सुरंग जैसे रस्ते से जाया जाता है, इस तहखाने को जाते रास्तो की दीवारे भी साधारण है. इस मकबरे में मुगलों के कई अन्य सदस्यों की भी कब्र है. मैंने करीब 1 घंटा यंहा बिताया और आपको भी सलाह देता हु की ताजमहल और लाल किले के साथ यंहा भी जरुर आये अगर आप आगरा आते है तो.

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Jaali Work Inside Tomb of akbar

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अकबर का मकबरा और उस पर जाट राजाओ का आक्रमण

अकबर का मकबरा 1686 में जाट राजाओ के हमले का शिकार हुआ था, जाटो ने औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों के तोड़ने और जाट राजा गोकुल को मारने का बदला आगरा पर हमला करके लिया था. उसी दौरान उन्होंने इस मकबरे को आग लगा दी जिस से यंहा दीवार पर बनाई गई कलाक्रति जल गई.

jaat attack on agra
जली हुई कलाकृति

औरंगजेब की घटिया करतूतों का खामियाजा अकबर के मकबरे ने झेला जो की शायद किसी ने नहीं सोचा होगा, खैर ये सब झेल कर भी आज ये इमारत सही हालत में खड़ी है.

ticket and other information about The tomb of akbar

अकबर का मकबरा देखने के लिए टिकेट की दर ज्यादा महंगी नहीं है केवल 20 रुपए की टिकेट है अगर आप व्यसक भारतीय है तो और विदेशियो के लिए टिकेट 200 रुपए है.

समयमकबरा सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है.

सिकंदरा एक व्यस्त इलाका है इसलिए सुबह जल्दी आने की कोशिश करे, आगरा से सिकंदरा की दुरी 4 km. है यंहा पार्किंग चार्ज 50 रुपए है. मार्च से जुलाई के बीच अगर आते है तो मौसम गर्म मिलेगा.

अकबर के मकबरे  के बारे में और पढने के लिए यंहा जाए  native planet

मेरा पिछला ब्लॉग – जय विलास ग्वालियर 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “अकबर का मकबरा – EXPLORING TOMB OF AKBAR THE GREAT

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