सास, bahu, मंदिर, ग्वालियर

A TRAVELOGUE TO SAS BAHU TEMPLE GWALIOR IN HINDI

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ग्वालियर किले के नजदीक बने Saas bahu temple gwalior को सहस्त्राबहू  मंदिर और हरिसद्नम मंदिर के नाम भी जाना जाता है. इन्हें लघभग एक हजार साल पहले ग्यारहवी सदी में राजा महिपाल द्वारा बनाया गया था. यंहा दो मंदिर बने है जिनमे से एक विष्णु के पद्मनाबा अवतार और शिव को समर्पित है. आज के दिन में यंहा पूजा अर्चना नहीं होती क्यूंकि एक समय था जब मुस्लिम शाशको ने इस बेहतरीन सास बहू मंदिर को तहस नहस कर दिया था, सबसे ज्यादा जुल्म तो औरंगजेब ने इस धरोहर पर किये थे जिसका जिक्र में लेख में आगे करूंगा .

ये लेख मेरी एतिहासिक धरोहरों के शहर ग्वालियर की मेरी पूरी तरह से अनियोजित यात्रा का दूसरा लेख है, एक नया शहर और घुमक्कड़ी की शुरुवात गुजरी महल से हुई वंही मौजूद लोगो से Saas bahu temple, तेली मंदिर , सूरज कुंड के बारे में बताया और मैंने किले को देखने से पहले इन सब जगह घुमनें की योजना बनाई.

Saas bahu temple gwalior, सास बहू, ग्वालियर
बड़ा मंदिर जो की भगवन विष्णु को समर्पित है (सास मंदिर )
Saas bahu temple gwalior, सास बहू मंदिर
छोटा मंदिर जो की भगवान् शिव को समर्पित है ( बहू मंदिर )

Saas bahu temple gwalior के इतिहास की कुछ बाते

ग्वालियर, मंदिर , सास बहू मंदिर
मंदिर के मुख द्वार पर दाई और भगवान विष्णु की मूर्ति है और बाई और उनकी पत्नी लक्ष्मी की मूर्ति है, ऊपर भगवान गणेश की न्रत्य मुद्रा में मूर्ति है

ये Saas bahu temple gwalior दो मंदिरों का समूह है जिसे ग्यारहवी सदी में राजा महिपाल ने बनवाया था वो  कच्छपघात राजवंश के राजा थे. उनकी माँ भगवान विष्णु को मानती थी इसलिए ये विष्णु मंदिर उन्होंने अपनी माँ के लिए बनवाया था . उपरोक्त तस्वीर में जो मंदिर है वही सास मंदिर अथवा विष्णु मंदिर है इसके मुख्य दरवाजे और अंदर दीवारों पर हीरे लगे थे जिन्हें बाद में मुस्लिम शाशको ने उतार लिया . एसा कहा जाता है की उन हीरो से रात में यंहा रौशनी की जाती थी ठीक सास बहू मंदिर के सामने एक खम्बा है जंहा मशाल जलाई जाती थी और उनकी रौशनी जब हीरो पर पड़ती थी तो यंहा रौशनी होती थी.

दूसरा मंदिर जब राजा महिपाल की शादी हुई तब उन्होंने अपनी पत्नी के लिए बनवाया था जो की शिव को मानती थी ये मंदिर सास मंदिर के मुकाबले छोटा है इसका केंद्र चार खम्बो पर टिका जबकि महामंड़प 12 खम्बो पर बना है. विष्णु मंदिर दो मंजिला है जो आज खम्बो के सहारे खड़ा है क्यूंकि यंहा आये भूकंप के चलते मंदिर में दरारे आ गई थी. मंदिरों के पास में बैटरी हाउस यानि गोला बारूद घर भी जन्हा सोलहवी सदी के मध्य तोप गोले रखे जाते थे और यंही से उनको दुश्मन पर दागा जाता था .

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शिव मंदिर

एक समय आया जब कच्छपघात राजवंश के साथ दगा करके उनसे प्रतिहारो ने किला छीन लिया था उनके राज तक ये मंदिर वैसे ही थे जैसे बनाये गये थे लेकिन बाद में जब मुसलमान शाशक भारत आये उन्होंने ग्वालियर को जीता तब उन्होंने इन मंदिरों को खंडित कर दिया. Saas bahu temple में रखी देवी देवताओ की मूर्तियों को किले से निचे फेंक दिया और दीवारों पर बनी कलाकर्तियो को तलवारों से तहस नहस कर दिया. मुग़ल शाशक औरंगजेब ने यंहा मदरसा भी चलाया इसकी दीवारों को चूने के प्लास्टर से ढकवा दिया ताकि इनकी मूर्तियों के अवशेष किसी को न दिखे.

लघभग तीन सदियों तक ये  ‘ Saas bahu temple gwalior ‘ यूँही तहस नहस और प्लास्टर में ढके रहा बाद में जब 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजो ने इस किले को जीता तब उनके राज में 1881 में दो ब्रिटिश पुरातत्विद भारत आये उन्होंने 12 साल तक इन मंदिरों पर लगे प्लास्टर को केमिकल से उतारा और वापस इनके असल रूप में लाये. मुस्लिम शाशको के जुल्म झेल कर भी ये मंदिर आज भी उतने ही सुंदर है भले ही इनकी मुर्तिया फेक दी गई पर ये दीवारे उनकी आस्था को आज भी बयाँ करती है .

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शिव मंदिर के अंदर
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सास मंदिर के अंदर

 Saas bahu temple की कुछ अन्य जानकारी

आगरा से 125 km दूर ये मंदिर ग्वालियर किले के अंदर बने है Saas bahu temple तक अपने वाहन से जाने के लिए उरवाई गेट से चढाई करनी पड़ती है किले को जाने वाले रस्ते पर दाई और तेली मंदिर से थोडा दूर ये मंदिर बने है. मंदिर के लिए टिकेट 10 रुपए की है जिसे आप मान महल की टिकेट के साथ भी खरीद सकते है .

यंहा जाने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय आदर्श समय है.अगर बजट से यात्रा कर रहे है तो ऑटो से आ सकते है और किले को घुमाने वाला गाइड कुछ कीमत लाकर आपको इन मंदिरों में भी घुमा सकते है.

मेरी राय है की ग्वालियर किले पर जाए तब  Saas bahu temple और इसके आसपास बने अन्य मंदिरों में अवश्य जाए ये धरोहर सदियों से मुस्लिमो के जुल्म झेल कर भी मूर्तिकला और नक्काशी का बेहतरीन उदाहरण है .

मेरा पिछला लेख पढने के लिए क्लिक करे – गुजरी महल ग्वालियर

सास बहू मंदिर ग्वालियर  के बारे में और पढने के लिए यंहा क्लिक करे

 

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

3 thoughts on “A TRAVELOGUE TO SAS BAHU TEMPLE GWALIOR IN HINDI

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