मेहरानगढ़ फोर्ट

मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर की सैर : Travel Guide PART 2

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मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर की सैर : Travel Guide PART 2

मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर की पिछली यात्रा में मैंने आपको राजा राम मेघवाल स्मारक तक सैर करवाई थी अब उस से आगे की यात्रा वहीँ से

मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर का लोहा गेट ( पोल )

लोहा पोल मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर
लोहा पोल मेहरानगढ़ फोर्ट

राजा राम के स्मारक से आगे चढाई चढने पर आता है लोहा गेट , जंहा पर जोधपुरी संगीतकार और कठपुतली का खेल दिखाने वाले कलाकार पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं इस दरवाजे पर एक और मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर  का कडवा सत्य आपके सामने आता है “ रानियों के सती होने से पहले दीवार पर बनाये गए निशान जो की हैरान कर देने वाले है खैर ये असल निशान नहीं है असली हाथ के निशान इसके निचे है जो की संख्या में पांच है ये उनको दर्शाती केवल एक पर्तिक्र्ती है .

hand marks mehrangarh fort, मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर
सती होने वाली रानियों के हाथ के निशान

दरअसल इनके पीछे कहानी है सन 1731 से जब हिन्दुओ में सती प्रथा चलन पर थी तब महाराजा अजित सिंह की मर्त्यु के समय उनकी 5 रानियों ने सती प्रथा का पालन किया और अपनी अंतिम समय में मेहरानगढ़ फोर्ट के इस दरवाजे पर मेंहदी भरे हाथो की छाप लगाकर महाराजा की चिता में अपने प्राणों को सती कर दिया था.

श्रंगार चौक

श्रंगार चौक मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर
झांकी महल श्रंगार चौक, मेहरानगढ़ फोर्ट

लोहा गेट के बाद लाल और सफ़ेद पत्थरों से बना चौक आता है जिसे श्रंगार चौक कहते है इस चौक पर मेहरानगढ़ के नए राजा का श्रंगार होता था यानी राज्याभिषेक होता था , यंहा से उत्सुकता बढ़ जाती है की आगे कौनसी जगह है क्युकी श्रंगार चौक की सुन्दरता किसी भी पर्यटक को मोहित कर देती है . जब बाहर से ही ये चौक इतना सुंदर है तो अंदर इसकी सुन्दरता कैसे होगी ये सवाल मेरे दिमाग में घूम रहा था .

चौक की इमारतो में बने झरोखे राजसी महिलाओ के लिए होते थे ताकि पर्दा प्रथा के बावजूद भी वो राजतिलक और अन्य त्यौहार देख सके .

श्रृंगार चौक पे अंदर प्रवेश हेतु कई दरवाजे बने है गाइड का अनुशरण करते हुए मेने एक दरवाजे से अंदर कदम रखे जो की मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर के संघ्राह्लय यानी म्यूजियम में ले कर जाता है

मेहरानगढ़ फोर्ट का म्यूजियम

howdah haathi paalki
शाहान्जाह द्वारा दिया गया हाव्दाह

म्यूजियम वो जगह है जहाँ पुराणी चीजो हथियारों को रखा जाता है आपके देखने के लिए , मैंने राजस्थान के कई किलो में म्यूजियम देखे है मेवाड़ हो या बीकानेर या जयपुर लेकिन हाव्दाह ( हाथी पर रखी जाने वाली सीट / कुर्सी ) कही नहीं देखा था. मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर में कई तरह के होअव्दाह है जिनमे से एक मुग़ल शाशक शान्ह्जहाँ द्वारा दिया हुआ था

इनका इस्तेमाल केवल शाही हाथियों पर होता था जब किसी राजा को प्रजा दर्शन के लिए जाना होता या कोई सम्मलेन होता .

museum mehrangarh

इनके अलावा रानियों के लिए कुछ पालकिया भी यंहा मौजूद है जिनमे से कुछ ढकी हुई परदे वाली पालकिया भी है जो की रानियों के लिए थी क्यूंकि राजा के अलावा किसी को हक़ नहीं था रानी को देखने का .

जोधपुर तोप

उपरोक्त तस्वीर में दिख रही तोप मछली मुख के साथ अजगर के आकर में है जो की 1607 में महाराजा सूर सिंह जी द्वारा जालोर से जीतकर लाई गई थी

gangaur jodhpur
गणगौर जोधपुर

गणगौर देवी की ये मूर्ति पार्वती का अवतार है जिसकी मारवाड़ की सुहागन हर साल पति की लम्बी उम्र के लिए पूजा करती है

मारवाड़ी बा सा और हुक्का
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हुक्के के साथ मारवाड़ी बा सा

इस हुक्के के साथ एक किस्सा जुड़ा है जो गाइड ने मुझे बताया की इस हुक्के का इस्तेमाल मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर के राज परिवार की महिलाए करती थी जब कोई उत्सव होता या वो सती होती थी ताकि जिन्दा आग में कूदने के डर से मुक्ति पा सके खैर इस बात से मै सहमत नहीं हु थोड़ी सी अजीब बात लगी गाइड के पास भी कोई संतुस्ट जवाब नहीं था इसी लिए हम भी वही मान लेते है जो बताया गया

दौलत खाना

दौलत खाना मेहरानगढ़

दौलत खाना उस जगह को कहते है जंहा समस्त दौलत को रखा जाता था , इस पर लगने वाले ताले में 4 चाबी थी और 4 चाबियों के साथ ही खुलता था .लोहे का ताला और उसपर लिखे लेख के अनुसार ताले को लोह पोल पर लगाया जाता था

दौलत खाना मेहरानगढ़

इसके अलावा दौलत खाने में हथियार ,औरतो की श्रृंगार पेटी , आभूषण बक्शा भी है और भी कई अन्य वस्तुए है

शीश महल
sheesh mahal in jodhpur
शीश महल

शीश महल असल में महाराजा अजीत सिंह जी का शयनकक्ष था , कांच की कारीगरी के कारण इसे शीश महल कहा जाता है . जयादा कुछ इसके बारे में गाइड से नहीं सुना केवल एक जगह जो की अपनी कारीगरी के वजह से पर्यटकों में लोकप्रिय है

फूल महल

phool mahal jodhpur

इस महल का निर्माण महाराजा अभय सिंह जी ने 1724 में करवाया था , महल की चाट में सोने की कारीगरी है जिसमे राज परिवार के सदस्यों के चित्र और कुल देवी देवताओ के चित्र बनवाए गए . महल की सुन्दरता पे नजर न लगे इस लिए काले गुच्छे हर कोने में लटकाए गए है . ये महल कई त्योहारों का शाक्षी रहा है

मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर  की यात्रा इस से आगे अगले भाग में जारी रहेगी part-3 यंहा पढ़े

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

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