सालम सिंह की हवेली

एक निर्दयी दीवान सालम सिंह की हवेली, जैसलमेर

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सालम सिंह की हवेली जैसलमेर किले से कुछ कदम दूर अमर सागर पोल के पास स्तिथ है, पीले पत्थर से बनी इस हवेली का निर्माण जैसलमेर के एक दीवान सालम सिंह ने 1815 अपने रहने के लिए करवाया था| आज के दिन में सालम सिंह की ये हवेली एक म्यूजियम है और जैसलमेर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में इसकी गिनती होती है|

Saalam singh ki haveli jaisalmer
सालम सिंह की हवेली से दीखता सोनार किला
सलीम सिंह की हवेली
जर्जर हवेली

सालम सिंह की हवेली  पहली बार मैंने जैसलमेर किले से देखी थी, एक जहाज जैसी दिखती पीले रंग की हवेली जिसकी दीवारों के पीछे एक निर्दयी दीवान के जुल्मो सितम की हकीकत छिपी है| दरअसल सालम सिंह एक भ्रष्ट, निर्दयी और शातिर दीवान था और वो जैसलमेर के किले पर राज करना चाहता था | उसने ये हवेली भी किले से ऊँची बनवाई थी ताकि यंहा के राजा को वो नीचा दिखा सके, लेकिन राजा को दीवान की ये हरकत पसंद नहीं आई और उन्होंने हवेली की ऊपर की दो मंजिले तुडवा दी थी|

इस हवेली की सबसे ख़ास बात ये है की ये बिना सीमेंट और पानी के बनी है, पूरी इमारत को बिना तोड़े खोल सकते है और वापस बना भी सकते है| हवेली के अंदर सजावट के लिए मोती और कांच का इस्तेमाल हुआ था जो बेल्जियम से मंगवाए गये थे, मोती अब दीवारों में नजर नहीं आते शायद उसके वंशजो ने उतार लिए थे|

बनावट के हिसाब से ये हवेली जैसलमेर के सबसे बेहतरीन वास्तुकला के नमूनों में से एक है लेकिन अब ये भी रखरखाव के अभाव में जर्जर होती जा रही है|

सालम सिंह की कहानी- क्यूँ बना था वो निर्दयी ?

सालम सिंह की निर्दयता की कहानी उसके बचपन से जुडी है, सालम के पिता सवरूप सिंह भी जैसलमेर के दीवान थे| लेकिन एक दिन भरे दरबार में जैसलमेर के राजकुमार राय सिंह ने सवरूप सिंह की गर्दन काट दी थी, उस वक्त सालम भी वहीँ मौजूद था| सवरूप सिंह की हत्या की वजह था उसके द्वारा राजपरिवार के खिलाफ रचे गये षड्यंत्रों का पर्दाफाश होना|

11 साल की उम्र में आँखों के सामने बाप की हत्या देखने के बाद सालम सिंह बदले की भावना से जल उठा और उसने ठान लिया के वो जैसलमेर के किले पर राज करेगा| जैसे जैसे उसकी उम्र बढती गई उसकी हसरते बलवान होती गयी और वो दिन प्रतिदिन निर्दयी होता गया| उसकी जुल्म इतने थे की कोई भी महिला इस हवेली के पास से नहीं गुजरती थी ना ही कोई पुरुष किसी बात के समाधान के लिए सालमसिंह के पास जाते थे|

SAALAM SINGH KI HAVELI, JAISALMER
शायद यहीं से सालम सिंह किले पर राज करने के सपने देखता था ( झरोखा )

सालम सिंह के जुल्मो का सबसे पुख्ता सबूत कुलधरा गाँव से मिलता है, कुलधरा की एक लड़की सालम को पसंद आ गयी और उसे पाने के लिए सालम ने गाँव वालो पर जुल्म ढहाना शुरू कर दिया था| तरह तरह के टैक्स, मार काट और पाबंधियो से तंग आकर एक दिन उन गांव वालों ने मजबूरन राजा की राजशाही त्याग दी और वो पलायन करके रातो रात जैसलमेर से चले गये| जैसलमेर के राजा उसके जुल्म से जब वाकिफ हुए तो उन्होंने सालम सिंह को देश निकाला दे दिया मगर शातिर दीवान के गिडगिडाने के बाद राजा ने उसके पद की कद्र करते हुए एक मौका और दिया| बदले की आग में जल रहा सालम सिंह फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और उसके जुल्म जारी रहे|

इतिहास में कोई ऐसे सबूत नहीं मिलते की सालम सिंह की मौत क्यूँ और कैसे हुई थी मगर किले में मिले गाइड के अनुसार सालम सिंह को उसके परिवार ने ही विष देकर मरवा दिया था| सालम सिंह ने इसके अलावा भी कई अन्य हवेली और तालाब भी बनवाए थे और यही बाते है जो कहीं न कहीं एक अय्याश दीवान के कलाकार किस्म होने का भी सबूत देते है | सालम सागर जैसलमेर से 6 km दूर बना तालाब है जिसका निर्माण सालम सिंह ने ही करवाया था और घुंघरू हवेली भी उसने ही बनवाई थी|

जैसलमेर की हवेलिया
दीवान का आरामगाह और उसमे मौजूद सजावट के सामान

कैसे पहुंचे सालम सिंह की हवेली तक

जैसलमेर किले से हवेली यही कुछ 150 मीटर दूर अमरसागर पोल के पास स्तिथ है और जिस जगह हवेली बनी है वो रास्ता काफी ब्यस्त और तंग है इसलिए पैदल जाना सबसे बेहतर है|

हवेली को सालम सिंह के वंशज संभालते है इसलिए इसमें घूमने के लिए टिकेट लेना पड़ता है जिसकी कीमत है 50 रुपए ( व्यस्क ) और फोटोग्राफी के लिए 100 रुपए|

CURRENT KING OF JAISALMER
दीवान के वंशज

हवेली में कुछ ख़ास देखने को नहीं है फिर भी अगर इतिहास में रूचि रखते है तो इसकी वास्तुकला देखने जा सकते हो , हवेली का ज्यादातर हिस्सा जर्जर हालत में है और कुछ पुराने साज सजावट के सामान के अलावा कुछ अन्य ख़ास आकर्षक चीज यंहा औजुद नहीं है| यंहा से सीधा पटवा हवेली भी जा सकते है जो यंहा से करीब 2 किलोमीटर दूर है |

Post Author: rao ankit

few months ago in 2017 I decided I'd rather make no money and do what I love rather than make alot of money and hate my job. now i think choosing traveling is Best decision of my life

2 thoughts on “एक निर्दयी दीवान सालम सिंह की हवेली, जैसलमेर

    Usha

    (November 4, 2018 - 4:25 am)

    Fascinating story!!!!!

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    (November 17, 2018 - 1:43 am)

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